एनआईए (NIA) कोर्ट द्वारा 10 आरोपियों पर चार्ज तय होने के बाद पूर्व गृह मंत्री ने उठाए गंभीर सवाल
मुंबई:
महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर एंटीलिया बम कांड और मनसुख हिरन हत्या मामले की जांच पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि जब महाराष्ट्र एटीएस (ATS) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) दोनों की जांच में पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की भूमिका सामने आई, तो उन्हें इस मामले में आरोपी क्यों नहीं बनाया गया।
यह सवाल तब सामने आया है जब हाल ही में मुंबई की विशेष एनआईए अदालत ने इस मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे और प्रदीप शर्मा समेत 10 आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए हैं।
अनिल देशमुख द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु:
- एंटीलिया साजिश के ‘मास्टरमाइंड’: अनिल देशमुख ने दावा किया कि एटीएस और एनआईए दोनों की ही जांच से यह निष्कर्ष निकला था कि इस पूरी साजिश का ताना-बाना तत्कालीन मुंबई पुलिस कमिश्नर के दफ्तर में ही बुना गया था और परमबीर सिंह ही इसके मुख्य सूत्रधार (मास्टरमाइंड) थे।
- पद से हटाने के बाद लगाया 100 करोड़ का आरोप: पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि एटीएस जांच में नाम आने के बाद ही उन्होंने परमबीर सिंह को कमिश्नर पद से हटाया था। इसके बाद प्रतिशोध की भावना से परमबीर सिंह ने उन पर बार और रेस्तरां से हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली का झूठा आरोप लगाया था।
- बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी का हवाला: देशमुख ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट में एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस रेवती मोहिते डेरे ने भी एनआईए से पूछा था कि जांच में तथ्य सामने आने के बावजूद परमबीर सिंह को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया।
क्या है एंटीलिया बम कांड और मनसुख हिरन मामला?
यह मामला 25 फरवरी 2021 का है, जब उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास ‘एंटीलिया’ के बाहर विस्फोटकों (जिलेटिन छड़ों) से भरी एक स्कॉर्पियो एसयूवी बरामद हुई थी। बाद में इस गाड़ी के मालिक कारोबारी मनसुख हिरन का शव संदिग्ध हालात में मिला था।
| विवरण | स्थिति / तथ्य |
| जांच एजेंसियां | शुरुआती जांच महाराष्ट्र एटीएस (ATS) ने की, बाद में मामला एनआईए (NIA) को सौंपा गया। |
| चार्जशीटेड आरोपी (10 नाम) | पूर्व पुलिसकर्मी सचिन वाझे, प्रदीप शर्मा, रियाजुद्दीन काजी, सुनील माने, विनायक शिंदे और 5 अन्य सहयोगी। |
| ताजा स्थिति | मुंबई की विशेष एनआईए अदालत ने 10 आरोपियों के खिलाफ चार्ज (आरोप) तय कर दिए हैं। |
पूर्व गृह मंत्री ने एनआईए से सवाल किया है कि जब कई पुलिस अधिकारियों के दर्ज बयानों और अदालत की टिप्पणियों में पूर्व कमिश्नर का नाम आया, तो केंद्रीय एजेंसी ने उन्हें सह-आरोपी बनाने से परहेज क्यों किया।

