गांधीजी के सत्याग्रह और मंडेला के विचारों को याद कर भारत-अफ्रीका के ऐतिहासिक व वैचारिक संबंधों को रेखांकित किया
नई दिल्ली:
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘अफ्रीका दिवस’ समारोह को संबोधित करते हुए भारत और अफ्रीका महाद्वीप के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वैचारिक संबंधों को रेखांकित किया।
महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका के दिनों को याद करते हुए विदेश मंत्री ने नेल्सन मंडेला का प्रसिद्ध कथन दोहराया—“आपने हमें मोहनदास गांधी दिए, हमने आपको महात्मा दिया।” उन्होंने कहा कि गांधी जी के अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों ने क्वामे नक्रुमा, जुलियस न्येरेरे और नेल्सन मंडेला जैसे महान अफ्रीकी नेताओं को स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरित किया।
हिंद महासागर: संस्कृति और व्यापार का सेतु
एस. जयशंकर ने दोनों क्षेत्रों के भौगोलिक और सांस्कृतिक जुड़ाव पर प्रकाश डालते हुए कहा:
- साझा विरासत: हिंद महासागर ने भारत और अफ्रीका को अलग नहीं किया, बल्कि जोड़ा है। मानसूनी हवाओं के जरिए सदियों से दोनों क्षेत्रों के बीच केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि संस्कृति, दर्शन, ज्ञान और जीवनशैली का आदान-प्रदान हुआ है।
- उपनिवेशवाद विरोधी संघर्ष: औपनिवेशिक शासन के दौरान दोनों क्षेत्रों ने समान पीड़ा झेली और स्वतंत्रता व मानव गरिमा के लिए मिलकर लड़ाई लड़ी। यही साझी एकजुटता आज के आधुनिक संबंधों की मजबूत नींव है।
50 अफ्रीकी राजनयिकों का किया स्वागत
| कार्यक्रम / पहल | विवरण |
| आयोजन का अवसर | नई दिल्ली में आयोजित ‘अफ्रीका दिवस’ (Africa Day) समारोह |
| विशेष कूटनीतिक पहल | सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान में प्रशिक्षण ले रहे 50 अफ्रीकी राजनयिकों का स्वागत किया गया। |
| साझेदारी का संदेश | जयशंकर ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अफ्रीका के साथ भारत की दीर्घकालिक कूटनीतिक साझेदारी और क्षमता निर्माण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
विदेश मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत और अफ्रीका समान और संप्रभु भागीदार के रूप में आगे बढ़ रहे हैं और यह संबंध भविष्य में वैश्विक शांति और विकास के लिए और मजबूत होंगे।

