वित्त मंत्रालय ने अक्तूबर से दिसंबर तिमाही की दरें कीं अधिसूचित; बढ़ोतरी की उम्मीदों पर फिरा पानी
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही यानी 1 अक्तूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक के लिए सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) और उससे जुड़ी अन्य समान भविष्य निधि योजनाओं पर मिलने वाली ब्याज दरों में कोई फेरबदल नहीं किया है। लंबे समय से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद लगाए बैठे लाखों केंद्रीय कर्मचारियों को इस फैसले से निराशा हाथ लगी है। सरकार ने इस तिमाही के लिए भी जीपीएफ की ब्याज दर को 7.1 प्रतिशत पर ही यथावत रखने की आधिकारिक घोषणा की है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह ब्याज दर सामान्य भविष्य निधि (केंद्रीय सेवाएं), अंशदायी भविष्य निधि (भारत), ऑल इंडिया सर्विसेज प्रोविडेंट फंड और अन्य संबंधित रक्षा व रेलवे भविष्य निधि योजनाओं पर समान रूप से लागू होगी। उल्लेखनीय है कि सरकार ने विगत छह वर्षों से जीपीएफ की ब्याज दर को एक ही स्तर यानी 7.1 फीसदी पर स्थिर बनाए रखा है।
इससे पहले वित्त मंत्रालय ने साल की शुरुआत में 1 जनवरी से 31 मार्च की तिमाही के लिए भी 7.1 प्रतिशत ब्याज दर अधिसूचित की थी। उस समय कर्मचारियों को बजट और नई वित्तीय घोषणाओं के मद्देनजर दरों में वृद्धि की प्रबल उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने दरों को अपरिवर्तित रखा। इसके बाद अप्रैल से जून और जुलाई से सितंबर की लगातार तिमाहियों में भी ब्याज दरों को उसी 7.1 प्रतिशत के स्तर पर फ्रीज रखा गया।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और अन्य लघु बचत योजनाओं के रुझानों को देखते हुए जीपीएफ की दरों में आंशिक बढ़ोतरी की जानी चाहिए थी। लंबे समय से ब्याज दरों के स्थिर रहने के कारण कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड की वास्तविक विकास दर पर सीधा असर पड़ रहा है। हालांकि, मौजूदा आर्थिक परिदृश्य और वित्तीय घाटे के संतुलन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने फिलहाल दरों को स्थिर बनाए रखने की नीति जारी रखी है।

