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Wednesday, February 28, 2024

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तूफान ओटिस ने मैक्सिको में मचाई तबाही, बिजली के खंभे और बड़े-बड़े पेड़ जड़ से उखड़े; 27 लोगों की हुई मौत

मैक्सिको में ओटिस तूफान ने तबाही मचा रखी है। यह तूफान इतना खतरनाक हो गया है कि इसने कम से कम सात लोगों की जान ले ली है। मैक्सिको सरकार के अनुसार, देश में आए अब तक के सबसे शक्तिशाली तूफानों में से एक ने अकापुल्को के समुद्र तट रिसॉर्ट को नुकसान पहुंचाया, जिससे अरबों डॉलर का नुकसान हुआ।

वहीं, इससे पहले ओटिस ने मेक्सिको में बुधवार को श्रेणी पांच के तूफान के रूप में तबाही मचाई। तटीय इलाकों को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। यह तूफान इतना तेज था कि इसने लोगों के घरों, उसके बाहर खड़ी गाडियों, बिजली के खंभों, पेड़ों और मोबाइल टावरों को बहुत नुकसान पहुंचाया। इससे सड़क एवं हवाई संपर्क बाधित हो गया है। तूफान की वजह से लगभग नौ लाख की आबादी वाला शहर अकापुल्को उजड़ गया है। सरकार ने कहा कि चार लोग अभी भी लापता हैं।

इतनी रफ्तार से आया तूफान

प्रशांत महासागर के तट पर स्थित मैक्सिको में 165 मील प्रति घंटे (266 किलोमीटर प्रति घंटे) की रफ्तार से आए तूफान से हुए नुकसान का आकलन करते हुए राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुएल लोपेज ओब्राडोर ने कहा कि अकापुल्को को जो नुकसान हुआ वह वास्तव में विनाशकारी है।

अस्पतालों में भरा पानी

राष्ट्रपति ने कहा, ‘तूफान इतना शक्तिशाली था कि इसने बड़े-बड़े पेड़ों को जड़ों से उखाड़ दिया। इतना ही नहीं, अस्पतालों में पानी भर गया। इसकी वजह से सैकड़ों मरीजों को सुरक्षित इलाकों में ले जाना पड़ा।’ सरकार ने क्षेत्र में आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी है, लेकिन इस बारे में बहुत कम जानकारी दी है कि 27 लोगों की मौत कैसे हुई या कितने अन्य घायल हुए।

तीन घंटे तक मौत का खेल

एक पेशेवर जादूगर एरिक लोजोया ने बताया कि उन्होंने अकापुल्को के एक होटल के कमरे में अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ तीन घंटे तक मौत का खेल देखा है। उन्होंने बताया कि तूफान इतना भयानक था कि खिड़कियों से टकरा गया था। उसके टकराने से बहरा कर देने वाला शोर हर तरफ गूंज रहा था। अपने परिवार और चार अन्य लोगों के साथ बाथरूम में फंसने वाले 26 वर्षीय लोजोया ने कहा कि ऐसा लग रहा था जैसे हमारे कान फटने वाले हैं। हमने गद्दे, पानी की टंकियों को उड़ते देखा। छत धंसने लगी।

उन्होंने बताया, ‘हालात बिगड़ते देख हम सब बाथरूम से बाहर निकल आए, लेकिन आठवीं मंजिल के कमरे में जल्द ही बाढ़ आने लगी और दो घंटे तक पानी में खड़ा रहना पड़ा क्योंकि हवा इतनी तेज थी कि बाहर निकलने के लिए दरवाजा नहीं खोला जा सकता था।’

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