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Thursday, April 18, 2024

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‘दुनिया के सामने संतुलन बनाना चुनौती’; इस्राइल-हमास सीजफायर पर भारत, महासचिव गुटेरस ने पहली बार दिखाई ताकत

भारत ने इस्राइल और हमास के हिंसक संघर्ष को खत्म करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच पर भारत उन 153 देशों में शामिल रहा, जिन्होंने पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में बीते दो महीने से अधिक समय से जारी युद्ध रोकने की वकालत कर रहे हैं। इस्राइल और अमेरिका सरीखे देशों के मजबूत प्रतिरोध के बावजूद भारत ने युद्धविराम प्रस्ताव का समर्थन किया। भारत का रूख स्पष्ट करते हुए संयुक्त राष्ट्र में राजदूत रुचिरा कंबोज ने कहा, टकराव बढ़ने के इस कठिन दौर में दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती फैसलों के बीच सही संतुलन कायम करना है।

उन्होंने हमास और इस्राइल के टकराव को असाधारण और कठिन समय करार दिया। संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि और भारतीय राजदूत रुचिरा कंबोज ने कहा, 193 सदस्यीय UNGA में भारत ने महासभा में अभी अपनाए गए प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है। उन्होंने कहा, UNGA महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुच्छेद 99 को लागू किया है। महासभा ने इस पहल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों की गंभीरता और जटिलता को रेखांकित किया है।

UN के 78 साल के इतिहास में कोवल 10 बार हुई यह खास घटना
गौरतलब है कि यूएनजीए के प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 99 के तहत लिखा गया महासचिव गुटेरस के 6 दिसंबर के पत्र का भी जिक्र किया गया। खास बात यह कि करीब छह साल पहले- 2017 में महासचिव बनने के बाद पहली बार उन्होंने इस अनुच्छेद का इस्तेमाल किया है। अनुच्छेद 99 में कहा गया है कि अगर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव की राय में अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा खतरे में हो, तो महासचिव किसी भी मामले को सुरक्षा परिषद (UNSC) के ध्यान में ला सकते हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के 78 साल लंबे इतिहास में अनुच्छेद 99 का इस्तेमाल बेहद दुर्लभ घटना रही है। सात दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी अतीत में ऐसे केवल 10 उदाहरण मिलते हैं, जब महासचिवों ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के मामले सुरक्षा परिषद में लाए गए हैं।

मिस्र के प्रस्ताव पर समर्थन में 153 देश; अमेरिका-इस्राइल का कड़ा विरोध
बता दें कि युद्धविराम का प्रस्ताव मिस्र ने पेश किया। प्रस्ताव में ‘तत्काल मानवीय युद्धविराम’ की मांग की गई। मिस्र ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा, सभी पक्ष अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का पालन करें। ऐसा खास तौर पर, नागरिकों की सुरक्षा के मामले में होना चाहिए। प्रस्ताव में ‘सभी बंधकों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई’ की मांग भी की गई। हालांकि, इस्राइल ने इस प्रस्ताव में हमास का नाम शामिल न होने को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। 

संयुक्त राष्ट्र में 10 देशों ने विरोध में मतदान किया
बता दें कि युद्धविराम के प्रस्ताव पर भारत समेत 153 देशों ने समर्थन किया। 10 सदस्य देशों ने विरोध में मतदान किया, जबकि 23 देशों ने मतदान नहीं किया। प्रस्ताव का विरोध करने वाले देशों में अमेरिका, इस्राइल, ऑस्ट्रिया, चेकिया, ग्वाटेमाला, लाइबेरिया, माइक्रोनेशिया, नाउरू, पापुआ न्यू गिनी और पैराग्वे हैं।

गाजा में युद्ध की विभीषिका, 18 हजार से अधिक की मौत, 50 हजार से घायल
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र में इस्राइली राजदूत गिलाद एर्दान ने UNGA में पोस्टर दिखाकर कहा कि युद्धविराम का समर्थन करने वाले देशों को हमास के प्रमुख याह्या सिनवार को फोन कर हथियार डालने के लिए राजी करना चाहिए।  बता दें कि याह्या सिनवार को युद्धग्रस्त गाजा पट्टी पर हमास का नेता माना जाता है। सात अक्तूबर को हुए हमलों के बाद इस्राइल ने सिनवार को पकड़ने के साथ-साथ हमास को नेस्तनाबूंद करने की कसम खाई है। बीते दो महीने से अधिक समय से जारी युद्ध में अब तक 18 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 50 हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं।

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