नीट पेपर लीक विवाद और 26 दिनों से जारी भूख हड़ताल के बाद बड़ा फैसला; आशुतोष रांका बोले—’मांगें मानी गईं, छात्र घर लौटें’
नई दिल्ली: नीट (NEET) पेपर लीक विवाद और लगातार हो रहे छात्र आंदोलनों के बीच देश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों से एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
राष्ट्रपति भवन के बयान में यह भी जानकारी दी गई है कि केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। प्रल्हाद जोशी वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ-साथ नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
जेपी नड्डा से वार्ता के बाद आंदोलन समाप्त करने का ऐलान
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर के साथ ही जंतर-मंतर पर एक महीने से चल रहा गतिरोध भी समाप्त हो गया है। शनिवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों की तीसरे दौर की वार्ता हुई, जो बेहद सफल रही।
वार्ता के बाद सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने प्रदर्शनकारियों से अपना आंदोलन समाप्त कर घर लौटने की अपील की:
- मांगें पूरी हुईं: आशुतोष रांका ने मीडिया से कहा कि सरकार ने उनकी मुख्य मांगों को स्वीकार कर लिया है, इसलिए अब प्रदर्शनकारी अपने-अपने घर लौट जाएं।
- भविष्य की रणनीति: उन्होंने बताया कि चार सप्ताह (एक महीने) बाद वे सरकार के साथ दोबारा बैठक करेंगे, जिसमें मानी गई मांगों की समीक्षा की जाएगी और देश की शिक्षा व्यवस्था में दीर्घकालिक सुधारात्मक कदमों पर चर्चा होगी।
26 दिनों का अनशन और छात्र संगठनों का संघर्ष
नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर के युवाओं, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का गुस्सा सड़कों पर था:
- सोनम वांगचुक का अनशन: पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और शिक्षा प्रणाली में कड़े सुधारों की मांग को लेकर 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहे थे।
- छात्र संगठनों की भागीदारी: इस आंदोलन में शुरुआत से ही कई छात्र संगठन मजबूती से डटे रहे। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA – सीपीआई-एमएल की छात्र इकाई) के तीन छात्रों ने भी 23 दिनों तक अनवरत अनशन किया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद लगभग एक महीने से जंतर-मंतर पर जमा प्रदर्शनकारियों और छात्रों के बीच राहत का माहौल है।

