ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि समानता कानून के अनुसार ‘महिला’ का मतलब केवल वही व्यक्ति है जो जन्म से जैविक रूप से महिला हो। न्यायमूर्ति पैट्रिक हॉज ने बताया कि पांचों जजों ने सर्वसम्मति से यह फैसला दिया है कि समानता कानून में ‘महिला’ और ‘लिंग’ शब्द का मतलब जैविक महिला से है। इस फैसले के अनुसार, कोई ट्रांसजेंडर व्यक्ति जिसे कानूनी रूप से महिला माना गया हो, उसे समानता कानून के तहत महिला नहीं माना जाएगा।
यह मामला 2018 में स्कॉटिश संसद की तरफ से पास किए गए एक कानून से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि स्कॉटलैंड के सार्वजनिक निकायों की बोर्ड में 50% महिलाएं होनी चाहिए। इस कानून में ट्रांसजेंडर महिलाओं को भी महिलाओं की परिभाषा में शामिल किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब उस परिभाषा को गलत ठहराया है। लेकिन इस कानून को एक महिला अधिकार समूह – फॉर वीमेन स्कॉटलैंड (एफडब्ल्यूएस) ने चुनौती दी। उनका कहना था कि महिला की यह नई परिभाषा कानूनी अधिकारों की सीमा से बाहर जाती है।
महिला अधिकार समूह ने क्या कहा?
एफडब्ल्यूएस का कहना है कि अगर ट्रांस महिलाओं को भी महिला माना जाए, तो कोई भी बोर्ड जिसमें 50% पुरुष और 50% ट्रांस महिलाएं (जिनके पास जेंडर मान्यता प्रमाणपत्र है) शामिल हों, उसे भी महिला प्रतिनिधित्व वाला बोर्ड माना जा सकता है। समूह की निदेशक ट्रिना बड्ज ने कहा-‘अगर हम ‘लिंग’ शब्द का सामान्य और जैविक अर्थ नहीं मानते, तो ऐसा हो सकता है कि एक बोर्ड में 50% पुरुष और बाकी 50% पुरुष ही हों जिनके पास महिला होने का प्रमाणपत्र हो, और फिर भी उसे महिला प्रतिनिधित्व वाला बोर्ड माना जाए।’
अब मामला सुप्रीम कोर्ट में क्यों है?
2022 में एक कोर्ट ने एफडब्ल्यूएस की चुनौती को खारिज कर दिया था। लेकिन 2023 में एफडब्ल्यूएस को यूके के सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की अनुमति मिल गई थी।
एफडब्ल्यूएस की वकील ऐडन ओ’नील ने अदालत में कहा कि- कानून में ‘लिंग’ शब्द का मतलब जैविक लिंग होना चाहिए। यानी कोई व्यक्ति पुरुष या महिला जन्म से होता है, न कि बाद में पहचान बदलने से। ‘लिंग’ एक शारीरिक सच्चाई है, जिसे बदला नहीं जा सकता।
एफडब्ल्यूएस को किसका समर्थन है?
इस समूह को प्रसिद्ध लेखिका जे.के. रोलिंग का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने इस समूह की मदद के लिए कई हजार पाउंड दान भी किए हैं। जे.के. रोलिंग पहले भी कह चुकी हैं कि ट्रांस महिलाओं को अधिकार देने से जन्म से महिलाओं के अधिकार कमजोर नहीं होने चाहिए।

