31 C
Mumbai
Tuesday, March 24, 2026
No menu items!

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) में खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान में चुनौतियां: सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी और सुधार की जरूरत

Array

आतंकी सूचनाएं एवं दूसरी बड़ी संभावित घटनाओं से जुड़ी जानकारी के आदान-प्रदान को लेकर देश के सबसे बड़े खुफिया तंत्र ‘आईबी’ के ‘मल्टी एजेंसी सेंटर’ (मैक) में जुबान खोलना आसान नहीं होता। इस केंद्र पर दो दर्जन से अधिक केंद्रीय जांच एवं सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी नियमित बैठक करते हैं। जिन एजेंसियों के पास जो इनपुट होता है, उसे मैक में साझा किया जाता है।

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, कई बार मैक में ‘जुबान’ खोलना आसान नहीं होता। सूचना होती है, मगर उसे साझा करने से गुरेज किया जाता है। वजह, सूचना थोड़ी बहुत अपुष्ट रहती है या फिर उस बाबत सवालों की बौछार संबंधित अधिकारी को चुप रहने के लिए मजबूर कर देती है। कई बार ऐसा भी होता है कि एक ही विषय पर कई एजेंसियों की तरफ से सूचना आती है। तब माहौल गर्मा जाता है कि किसकी सूचना को ‘प्रथम’ माना जाए। अपनी सूचना को ‘टॉप’ पर रखने के लिए एजेंसियों के बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल बन जाता है।

खासतौर से जम्मू कश्मीर, मणिपुर सहित नॉर्थ ईस्ट के दूसरे सीमावर्ती इलाके, पाकिस्तान एवं बांग्लादेश बॉर्डर, ड्रग्स और समुद्री क्षेत्रों से जुड़ी खुफिया सूचनाओं पर खूब माथापच्ची होती है। यहां तक कि ‘सूचना’ का स्त्रोत भी पूछा जाता है।

मैक में ‘हंसे तो फंसे’ का खेल और अलर्ट साझा करने में झिझक

मैक में खुफिया अलर्ट या दूसरी तरह की संजीदा जानकारी रखने वाले अधिकारी कई बार ‘हंसे तो फंसे’ के खेल में घिर जाते हैं। अगर किसी एजेंसी के अफसर के पास ज्यादा पुख्ता जानकारी नहीं है या उस बाबत पर्याप्त तथ्य पेश करने में वह असफल रहता है तो उस पर इतने सवालों की बौछार होती है कि वह खुद को हंसी का पात्र समझने लगता है।

नतीजा, कई बार कम पुख्ता या छोटी सूचनाओं को मैक में बताने से संबंधित अधिकारी गुरेज करने लगता है। इसमें किसी बड़ी वारदात का अलर्ट दबने की संभावना बनी रहती है। कोई अहम सूचना जो सुरक्षा बलों या जांच एजेंसियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है, समय रहते उस पर काम नहीं हो पाता। बाद में उसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

एजेंसियों के बीच प्रतिस्पर्धा और सूचना गिराने की कोशिश

एक एजेंसी, दूसरी एजेंसी द्वारा दिए गए इनपुट को गिराने का प्रयास करती है। मणिपुर और उत्तर पूर्व के राज्यों से जुड़े इनपुट पर कई एजेंसियां आपस में भिड़ जाती हैं। बैठक में इनपुट की गहराई एवं ठोस स्त्रोत का राज खोलने के लिए कहा जाता है।

26/11 के मुंबई हमले के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार ने अमेरिकी खुफिया तंत्र की तर्ज पर मैक का गठन किया था। मैक में एनआईए, सीबीआई, रॉ, डीआरआई, ईडी, सभी अर्धसैनिक बल, आरपीएफ और तीनों सेनाओं की खुफिया विंग सहित लगभग दो दर्जन से अधिक एजेंसियां आतंकी एवं दूसरी अहम सूचनाएं साझा करने के लिए दिल्ली में नियमित बैठक करती हैं।

सूचना साझा करने में पशोपश और हंसी का डर

सूत्र बताते हैं कि मैक में जब किसी एजेंसी द्वारा कोई सूचना साझा की जाती है तो संबंधित अफसर पर न केवल सवालों की झड़ी लगती है, बल्कि सूत्र का नाम, पता और फोन नंबर तक देने का दबाव डाला जाता है। इस वजह से सूचना लाने वाली एजेंसी भी पशोपश में पड़ जाती है।

मैक में सुधार की जरूरत और विशेषज्ञों की राय

खुफिया इकाई के मल्टी एजेंसी सेंटर में दागे जाने वाले दर्जनों सवालों के भय से कई बार जरूरी सूचनाएं बीच राह में ही अटक जाती हैं। अगर कोई सूचना पहुंचती है तो उसमें ठोस सबूत नहीं होते।

रिटायर्ड आईपीएस शंकर सेन ने मैक को लेकर कहा था कि मैक में बेहतर समन्वय की काफी गुंजाइश है। एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाना होगा। इसके लिए मैक में कई तरह के सुधार करने बहुत जरूरी हैं।

गृह मंत्री अमित शाह की बैठक और सुधार पर जोर

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गत वर्ष जुलाई में विभिन्न सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों के साथ देश की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आईबी के मल्टी एजेंसी सेंटर की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी।

शाह ने देशभर की खुफिया और प्रवर्तन एजेंसियों सहित विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों को राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति ‘संपूर्ण सरकार’ दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश दिया। उन्होंने आतंकी नेटवर्क और उनके सहायक इको-सिस्टम को खत्म करने के लिए सभी एजेंसियों के बीच अधिक तालमेल पर जोर दिया।

तकनीकी सुधार और नई चुनौतियों के लिए तैयार रहने का आह्वान

केन्द्रीय गृह मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, मैक फ्रेमवर्क अपनी पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए बड़े तकनीकी व ऑपरेशनल सुधारों को लागू करने को तैयार है।

उन्होंने सभी स्टेकहोल्डर्स से त्वरित प्रतिक्रियाओं और साझा की गई जानकारियों के एग्रेसिव फॉलोअप के माध्यम से इन प्रयासों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

निष्कर्ष: समन्वय और सुधार की दरकार

मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) के संचालन में चुनौतियां स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं। विभिन्न खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और सूचना साझा करने में झिझक के कारण कई बार अहम जानकारियां दब जाती हैं।

मैक को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी सुधारों, बेहतर प्रशिक्षण, और एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने की आवश्यकता है। अगर छोटी बड़ी सभी खुफिया सूचनाओं का सूक्ष्म तरीके से अध्ययन किया जाए तो आतंकी हमलों को होने से पहले ही रोका जा सकता है।

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here