27 C
Mumbai
Thursday, April 16, 2026
No menu items!

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई सीएसटी रेलवे स्टेशन पर कैटरिंग स्टॉल में लापरवाही पर जताई सख्ती

Array

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी) रेलवे स्टेशन पर कैटरिंग स्टॉल के प्रबंधन में हुई गंभीर लापरवाही पर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने भारतीय रेलवे और इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

रेलवे प्रशासन की लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने इस मामले में आईआरसीटीसी की प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा किया। अदालत ने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की रिपोर्ट में रेलवे अधिकारियों की गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा।

सीवीसी रिपोर्ट में अधिकारियों की गलती उजागर

सीवीसी द्वारा दाखिल की गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि रेलवे अधिकारियों की लापरवाही और अव्यवस्था के कारण कैटरिंग सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। रिपोर्ट में स्टॉल आवंटन प्रक्रिया में अनियमितताओं और खाद्य गुणवत्ता मानकों के पालन में चूक का भी जिक्र किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और सुधार की आवश्यकता

शीर्ष अदालत ने रेलवे से इस मामले में शीघ्र सुधारात्मक कार्रवाई करने को कहा है। अदालत ने निर्देश दिया कि यात्रियों की सुविधा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए रेलवे कैटरिंग सेवाओं को पारदर्शी और सुचारू बनाया जाए।

आईआरसीटीसी पर सवाल, रेलवे को कार्रवाई के आदेश

आईआरसीटीसी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेलवे को अपनी कैटरिंग सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो। अदालत ने रेलवे प्रशासन को इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के भी निर्देश दिए हैं।

रेलवे स्टेशनों पर खानपान सेवाओं में सुधार की दिशा में सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप यात्रियों के लिए राहतभरा कदम साबित हो सकता है। अब यह देखना होगा कि रेलवे प्रशासन इस पर क्या ठोस कदम उठाता है।

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here