नई दिल्ली: भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में कार्यरत एक महिला कार्मिक ने अपने लिंग परिवर्तन (Gender Transition) की अनुमति मांगी थी। हालांकि, इस मामले में सेंट्रल सिविल सर्विसेज (Central Civil Services) नियमावली और आईटीबीपी बल अधिनियम एवं नियमों में लिंग परिवर्तन को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश मौजूद नहीं हैं। इसी कारण यह मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) को भेज दिया गया, ताकि इस पर उचित राय ली जा सके।
गृह मंत्रालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित टिप्पणी दी, लेकिन चूंकि सुरक्षा बलों में इस तरह का मामला पहले कभी सामने नहीं आया था, इसलिए इसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के अपर महानिदेशक (चिकित्सा) के पास भेज दिया गया।
फोर्स में लिंग परिवर्तन की अनुमति नहीं
अपर महानिदेशक (चिकित्सा) सीएपीएफ की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया कि फोर्स में सेवा शर्तों और विभिन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिंग परिवर्तन की मंजूरी नहीं दी जा सकती। उनकी दलील थी कि अर्धसैनिक बलों में सेवा के दौरान विभिन्न शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जो ट्रांसजेंडर पहचान के संदर्भ में जटिल हो सकती हैं।
पहला मामला, नई नीति की जरूरत?
यह पहली बार है जब किसी अर्धसैनिक बल के कर्मी ने आधिकारिक रूप से लिंग परिवर्तन की अनुमति मांगी है। वर्तमान में, आईटीबीपी या अन्य केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में इस तरह के मामलों के लिए कोई निर्धारित नीति नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले से भविष्य में अन्य सुरक्षा बलों में भी नीति निर्माण की दिशा में नई बहस छिड़ सकती है।
गौरतलब है कि देश में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 मौजूद है, जो लिंग पहचान को लेकर व्यक्ति को अधिकार प्रदान करता है। हालांकि, सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक बलों में अभी भी इस विषय पर कोई स्पष्ट नियम या दिशानिर्देश नहीं बनाए गए हैं।
क्या होगा अगला कदम?
इस मामले पर गृह मंत्रालय और सीएपीएफ के उच्च अधिकारी आगे विचार कर सकते हैं कि सुरक्षा बलों में लिंग परिवर्तन को लेकर कोई नीति बनाई जाए या नहीं। फिलहाल, संबंधित महिला कार्मिक की याचिका को अस्वीकार कर दिया गया है।

