28.8 C
Mumbai
Friday, July 17, 2026

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

चेन्नई: कुडनकुलम परमाणु संयंत्र डेटा लीक पर केंद्र सरकार की सफाई, कहा- कोई संवेदनशील जानकारी चोरी नहीं हुई

तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (KKNPP) से जुड़ी इलेक्ट्रॉनिक फाइलों में कथित डेटा सेंधमारी (डेटा लीक) के मामले पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि संयंत्र से जुड़ी कोई भी संवेदनशील या गोपनीय जानकारी लीक नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में तुरंत किसी उच्च-स्तरीय समीक्षा की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह सेंधमारी परमाणु सुरक्षा (न्यूक्लियर सेफ्टी) या मुख्य परमाणु संयंत्र के कोर सिस्टम से जुड़ी नहीं है।

लीक हुआ डेटा किससे संबंधित था?

केंद्रीय मंत्री का यह बयान कुडनकुलम संयंत्र का संचालन करने वाली सरकारी कंपनी ‘भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड’ (NPCIL) के स्पष्टीकरण के एक दिन बाद आया है। एनपीसीआईएल ने अपने बयान में कहा था कि जो डेटा लीक होने का दावा किया जा रहा है, वह केवल संयंत्र के इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (EPC) अनुबंध से जुड़ा था। यह अनुबंध सामान्य सेवाओं यानी ‘बैलेंस ऑफ प्लांट’ (BOP) पैकेज से संबंधित है।

एनपीसीआईएल के मुताबिक, इस अनुबंध के तहत केवल सामान्य सेवा सुविधाओं की इंजीनियरिंग, खरीद, आपूर्ति, निर्माण और उन्हें चालू करने जैसे काम शामिल हैं। ये सुविधाएं बेहद सामान्य प्रकृति की हैं, जो आमतौर पर पारंपरिक ताप बिजली संयंत्रों (थर्मल पावर प्लांट) और अन्य बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में भी इस्तेमाल की जाती हैं। गौरतलब है कि यह अनुबंध साल 2018 में एक सार्वजनिक निविदा (ओपन टेंडर) प्रक्रिया के माध्यम से रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को दिया गया था।

वीवीईआर (VVER) डिजाइन पर आधारित है संयंत्र

कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में रूस के तकनीकी सहयोग से तैयार किए गए वीवीईआर (VVER) डिजाइन के छह दबावयुक्त जल रिएक्टर (Pressurized Water Reactors) शामिल हैं। इनमें से पहली दो इकाइयां (केकेएनपीपी यूनिट-1 और यूनिट-2) पहले से ही पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। वहीं, यूनिट-3 और यूनिट-4 का निर्माण कार्य अभी प्रगति पर है और इनके साल 2027 तक चालू होने की उम्मीद जताई जा रही है।

हैकर्स ने किन फाइलों तक पहुंच का किया दावा?

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘वर्ल्ड लीक्स’ नामक एक रैनसमवेयर हैकर समूह ने साल 2016 से लेकर 2025 के मध्य तक की 19 हजार से ज्यादा फाइलों और दस्तावेजों तक अवैध पहुंच बनाने का दावा किया है। इन फाइलों में कथित तौर पर केकेएनपीपी की इंजीनियरिंग डिजाइन से जुड़ी जानकारियां, नियंत्रण, कूलिंग और वेंटिलेशन सिस्टम से संबंधित कागजात, उपकरणों की आपूर्ति करने वाले विक्रेताओं (वेंडर्स) व आपूर्तिकर्ताओं की सूची तथा प्रबंधन की बैठकों से जुड़ी परिचालन फाइलें शामिल बताई गई थीं।

एनपीसीआईएल की ओर से सुरक्षा का पुख्ता आश्वासन

हैकर्स के दावों को खारिज करते हुए एनपीसीआईएल ने एक बार फिर देश को आश्वस्त किया है। कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में दोहराया, “सार्वजनिक डोमेन में जो जानकारी उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है, वह पूरी तरह से सामान्य बैलेंस ऑफ प्लांट (BOP) सुविधाओं से संबंधित है। इसका देश की परमाणु सुरक्षा या परमाणु सुरक्षा से जुड़ी किसी भी मुख्य प्रणाली अथवा गोपनीय तकनीकी जानकारी से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है।” संयंत्र के सभी सुरक्षा तंत्र पूरी तरह अभेद्य और सुरक्षित हैं।

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here