बेंगलुरु: कर्नाटक की वित्तीय स्थिति को लेकर राज्य में एक नया सियासी घमासान छिड़ गया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद बसवराज बोम्मई ने शनिवार (6 जून 2026) को कांग्रेस सरकार की आर्थिक नीतियों और बजटीय कुप्रबंधन पर तीखा हमला बोला। बोम्मई ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से राज्य की वास्तविक आर्थिक हालत को सार्वजनिक करने के लिए तुरंत एक ‘श्वेत पत्र’ (White Paper) जारी करने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदेश की जनता के सामने यह पूरी तरह स्पष्ट करना चाहिए कि उसे पिछली भाजपा सरकार से कैसी मजबूत वित्तीय स्थिति विरासत में मिली थी।
ठेकेदारों के ₹23,000 करोड़ के बिल पेंडिंग, उत्पीड़न और भ्रष्टाचार के आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने सिद्धारमैया-शिवकुमार सरकार की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लेते हुए गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने सनसनीखेज दावा किया कि अकेले उत्तर कर्नाटक (North Karnataka) क्षेत्र में स्थानीय ठेकेदारों के करीब 23,000 करोड़ रुपये के विकास बिल लंबे समय से लंबित (पेंडिंग) पड़े हैं। बोम्मई ने आरोप लगाया, “इन जायज बिलों के भुगतान को पास कराने के बदले में सरकारी अधिकारियों, मंत्रियों और सत्ताधारी विधायकों पर ठेकेदारों के मानसिक उत्पीड़न और खुलेआम कमीशनखोरी-भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लग रहे हैं।”
बोम्मई ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के उस हालिया बयान पर भी कड़ा तंज कसा जिसमें उन्होंने अधिकारियों को ‘सिस्टम’ को दरकिनार न करने की हिदायत दी थी। बोम्मई ने सवाल उठाया कि जब सरकार खुद किसी स्पष्ट वित्तीय नीति और विज़न के बिना काम कर रही है, तो मुख्यमंत्री के इस कथित ‘सिस्टम’ का वास्तविक जमीनी अर्थ आखिर क्या है?
बजट का 90% हिस्सा केवल अनिवार्य खर्चों में; विकास के लिए पैसा नहीं
राज्य के बजट का तकनीकी विश्लेषण करते हुए भाजपा सांसद ने दावा किया कि कर्नाटक के 4.5 लाख करोड़ रुपये के विशाल बजट का 90 प्रतिशत ($90\%$) से अधिक हिस्सा केवल सरकारी कर्मचारियों के वेतन, बुजुर्गों की पेंशन, पुराने ऋणों के ब्याज भुगतान और लोकलुभावन चुनावी गारंटी योजनाओं जैसे अनिवार्य खर्चों को पूरा करने में ही खत्म हो जाता है।
उन्होंने पूछा, “ऐसी विकट स्थिति में राज्य में बुनियादी ढांचे और नए विकास कार्यों (Development Projects) के लिए नाममात्र की राशि बचती है। इस भयंकर वित्तीय कुप्रबंधन के बीच सरकार कर्नाटक के चौतरफा विकास का नेतृत्व आखिर कैसे कर पाएगी?” उन्होंने सरकार को चुनौती दी कि वह श्वेत पत्र के जरिए साफ करे कि जो भारी-भरकम कर्ज (उधार) लिया जा रहा है, उसका इस्तेमाल पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में हो रहा है या सिर्फ रेवड़ियां बांटने में। बोम्मई ने याद दिलाया कि कोविड-19 महामारी के भीषण संकट के दौरान भी उनकी भाजपा सरकार ने कड़ा वित्तीय अनुशासन बनाए रखा था और राजस्व का रिसाव रोककर अर्थव्यवस्था को पूरी मजबूती से संभाला था।
खाद-बीज की किल्लत और कालाबाजारी; संकट में अन्नदाता
कर्नाटक के कृषि क्षेत्र की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की आंतरिक राजनीतिक कलह और प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण यह सरकार किसानों की समस्याओं को पूरी तरह भूल चुकी है। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में किसानों के लिए खरीफ सीजन के बीज और उर्वरक (खाद) की उपलब्धता जैसे सबसे संवेदनशील और जरूरी मुद्दों को एजेंडे में प्राथमिकता तक नहीं दी गई।
राज्य के कई ग्रामीण इलाकों से बीज और खाद की भारी किल्लत की शिकायतें आ रही हैं, जिसका फायदा उठाकर कालाबाजारी करने वाले व्यापारी जमाखोरी कर रहे हैं और अन्नदाताओं को ऊंचे दामों पर कृषि उत्पाद बेच रहे हैं। बोम्मई ने सरकार से इस मामले में तुरंत दखल देकर उचित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की। इसके अलावा, उन्होंने भाजपा के भीतर राज्य स्तर पर नेतृत्व परिवर्तन की तमाम मीडिया अटकलों को पूरी तरह निराधार, मनगढ़ंत और काल्पनिक बताया।

