चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। पिछले एक दशक से चला आ रहा डीएमके (DMK) और कांग्रेस का साथ अब आधिकारिक तौर पर खत्म हो गया है। कांग्रेस ने राज्य में सरकार बनाने के लिए अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को समर्थन देने का फैसला किया है।
सत्ता का नया समीकरण
हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में विजय की नवगठित पार्टी ‘टीवीके’ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीती हैं। हालांकि, यह बहुमत के आंकड़े (118) से थोड़ा दूर है। कांग्रेस, जिसने डीएमके के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और 5 सीटें जीती हैं, अब टीवीके के साथ खड़ी हो गई है।
कांग्रेस की मुख्य शर्तें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गिरीश चोडंकर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में समर्थन के लिए कुछ प्रमुख शर्तें रखी गई हैं:
- सांप्रदायिकता से दूरी: गठबंधन में ऐसी किसी भी ताकत को शामिल नहीं किया जाएगा जो भारतीय संविधान में विश्वास नहीं रखती या सांप्रदायिक राजनीति करती है।
- सत्ता में हिस्सेदारी: यह गठबंधन केवल बाहरी समर्थन तक सीमित नहीं होगा, बल्कि ‘उचित हिस्सेदारी’ और ‘आपसी सम्मान’ के सिद्धांत पर चलेगा।
- भविष्य की रणनीति: यह साझेदारी केवल वर्तमान सरकार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आगामी स्थानीय निकाय, लोकसभा और राज्यसभा चुनावों में भी जारी रहेगी।
विशेषज्ञों की राय: रणनीति या अवसरवाद?
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं:
- पुनरुद्धार की कोशिश: वरिष्ठ पत्रकार मालन का मानना है कि कांग्रेस तमिलनाडु में खुद को जमीनी स्तर पर पुनर्जीवित करना चाहती है। लंबे समय तक डीएमके की छाया में रहने के बाद, पार्टी अब स्वतंत्र पहचान तलाश रही है।
- अवसरवादी निर्णय: वहीं, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का तर्क है कि यह एक अवसरवादी फैसला है, क्योंकि कांग्रेस के पास खुद का बहुमत नहीं है और वह सत्ता में बने रहने के लिए टीवीके का सहारा ले रही है।
राज्यपाल को सौंपा समर्थन पत्र
बुधवार को विजय ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की और उन्हें विधायकों के समर्थन का औपचारिक पत्र सौंपा। इस समर्थन के साथ ही विजय के तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री बनने का मार्ग लगभग साफ हो गया है।

