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पता चलने से पहले ही फेल ही फेल हो चुकी थी किडनी

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दबे पांव दस्तक देने वाली किडनी की बीमारी किसी भी आयुवर्ग में हो सकती है। जिले में किडनी के रोगियों की संख्या बढ़ी है। ज्यादातर मामलों में मरीजों को किडनी की बीमारी का पता तब चला जब उनकी दोनों किडनी फेल हो गई। ऐसे मरीज डायलिसिस पर हैं। हमने कुछ ऐसे ही मरीजों से इस बीमारी के बारे में समझने की कोशिश की ताकि दूसरों तक यह संदेश जाए कि उन्हें इस गंभीर होती समस्या पर क्या सावधानी बरतनी चाहिए।

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पैरों में आई सूजन, जांच में किडनी फेल की पुष्टि
जनपद जालौन के थाना कदौरा के उदनपुर गांव का रामफल (30 वर्ष) बताता है कि वह मुंबई में क्रेन ऑपरेटर था। इसी साल जनवरी से उसकी तबियत खराब हुई। पैरों में सूजन आई तो उसे लगा कि काम की थकावट या सफर की वजह से ऐसा हुआ होगा। मुंबई से गांव लौटा तो हालत और ज्यादा खराब हुई। कानपुर में जांच हुई तो पता चला कि किडनी खराब हो गई है। अब कानपुर का ही इलाज चल रहा है और सप्ताह में तीन दिन डायलिसिस कराने जिला अस्पताल आना पड़ता है। कामकाज सब कुछ छूट चुका है।

जीने के लिए हर दो दिन में डायलिसिस
17 साल की एक किशोरी का जीवन भी सप्ताह में तीन दिन की डायलिसिस पर है। किशोरी के पिता किसान हैं। सरीला तहसील के एक गांव से हर दूसरे दिन पुत्री को साथ लेकर अस्पताल आते हैं। बताते हैं कि दो माह हो गए हैं डायलिसिस कराते, अब थोड़ा सुधार हुआ। उन्होंने बताया कि पुत्री को अनियमित माहवारी की शिकायत थी। काफी इलाज कराया, मगर आराम नहीं मिला। एक-एक माह तक उसे रक्तस्राव की शिकायत रहती थी। झांसी में एक प्राइवेट अस्पताल में किडनी के खराब होने की पुष्टि हुई। पिता बताते हैं कि इतनी कम उम्र में किडनी जैसी बीमारी क्यों और कैसे हुई वह लोग स्वयं नहीं समझ पा रहे। इससे पहले वह स्वस्थ थी। आठवीं पास कर चुकी थी। लेकिन अब सब कुछ बंद है।

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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ.विनय प्रकाश बताते हैं कि गुर्दे फेल होने के अंतिम चरण में मरीज को बार-बार उल्टी आती है और भूख कम लगती है। हीमोग्लोबिन का स्तर गिरना शुरू हो जाता है और व्यक्ति पीला दिखने लग सकता है, बिना शरीर से खून बाहर हुए। यह गुर्दे की बीमारी की सामान्य जटिलताओं में से एक है। इससे कमजोरी और थकान भी हो सकती है। पैरों-टखने में अगर सूजन की शिकायत है या बार-बार पेशाब होता है और उसके साथ ब्लड भी आ जाता है तो तत्काल किडनी की जांच करानी चाहिए। किडनी में इन्फेक्शन से भी कई बार ऐसा होता है। इसका तो इलाज है, लेकिन यदि किडनी फेल हो गई तो किडनी ट्रांसप्लांट और डायलिसिस के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है।

कई कारणों से फेल हो जाती है किडनी

जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ.आरएस प्रजापति का कहना है कि किडनी फेल होने के कई कारण होते हैं। जिनमें मुख्य रूप से किसी बीमारी की वजह से यूरिन का कम हो जाना, हार्ट अटैक, दिल की बीमारी, लिवर का फेल हो जाना, प्रदूषण, बिना परामर्श के दर्द निवारक गोलियां का लंबे समय तक प्रयोग, क्रोनिक डिजीज, डिहाइड्रेशन, शुगर, गंभीर इंफेक्शन है। अनियमित ब्लड प्रेशर भी किडनी फेल होने का कारण बन सकता है।

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होमो डायलिसिस यूनिट में 24 मरीज रजिस्टर्ड
जिला अस्पताल की होमो डायलिसिस यूनिट के प्रबंधक ज्ञानेंद्र गौतम ने बताया कि यूनिट में कुल 24 मरीज रजिस्टर्ड हैं, जिनका नियमित डायलिसिस होता है। इसमें सबसे कम उम्र की 17 साल की किशोरी है। यूनिट में शिफ्टों में डायलिसिस होती है। किसी किस्म का कोई शुल्क नहीं लिया जाता। सिर्फ एक रुपए के पर्चे पर मरीजों का डायलिसिस होता है।

जरूरी बातें

शरीर के इन पांच संकेतों की न करें अनदेखी
1- भूख में कमी आना शरीर में विषाक्त पदार्थों और वेस्ट का संचय भी आपकी भूख को कम कर सकता है, जिससे वजन घटने लगता है।
2- टखने और पैरों में सूजन
3- त्वचा में सूखापन और खुजली
4- कमजोरी और थकान महसूस होना
5- बार-बार पेशाब आना

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं इन उपायों को
1- व्यायाम करें
2- शुगर या शर्करा की मात्रा पर नजर रखें
3- रक्तचाप सामान्य रखें
4- वजन नियंत्रित रखें
5- पर्याप्त पानी का सेवन करें
6- धूम्रपान से बचें
7- दवाइयों के अधिक सेवन से बचें

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