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Sunday, July 19, 2026

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‘तकनीक कितनी भी एडवांस हो, जंग का आखिरी फैसला सैनिक ही करता है’: पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे

कोलकाता: क्या भविष्य के युद्ध केवल ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दम पर लड़े जाएंगे? इस चर्चा के बीच पूर्व सेना प्रमुख सेवानिवृत्त जनरल मनोज पांडे ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि तकनीक चाहे जितनी भी उन्नत हो जाए, युद्ध का अंतिम फैसला मैदान में डटने वाला सैनिक ही करता है। इसके साथ ही उन्होंने कोलकाता और पूर्वोत्तर क्षेत्र में बड़े रक्षा विनिर्माण केंद्र (डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब) बनने की अपार संभावनाओं पर भी जोर दिया।

आधुनिक तकनीक सहायक है, विकल्प नहीं

व्यान जियो-इकोनॉमिक फोरम (VGEF) द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक लचीलापन’ संगोष्ठी को संबोधित करते हुए पूर्व सेना प्रमुख ने उन धारणाओं को गलत बताया जिनमें कहा जा रहा है कि पारंपरिक युद्ध का दौर खत्म हो रहा है। उन्होंने कहा कि ड्रोन, सटीक निशाना लगाने वाले हथियार और एआई युद्ध की क्षमता को जरूर बढ़ाते हैं, लेकिन वे केवल एक सहायक के रूप में काम करते हैं। किसी भी युद्ध का परिणाम तकनीक नहीं, बल्कि सैनिक का साहस, उसका प्रशिक्षण और कुशल नेतृत्व तय करता है।

कोलकाता और पूर्वोत्तर में रक्षा निर्माण की भारी संभावनाएं

जनरल मनोज पांडे ने कहा कि पूर्वी भारत में रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की जबरदस्त क्षमता है। उन्होंने अपने सैन्य करियर के अनुभवों को साझा करते हुए कहा:


“इस क्षेत्र में चार कार्यकाल बिताने के कारण मैं यहां की क्षमताओं को अच्छी तरह जानता हूं। आईआईटी-खड़गपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान, कुशल मानव संसाधन और बेहतर औद्योगिक आधार मिलकर कोलकाता और पूर्वोत्तर को रक्षा निर्माण का मजबूत केंद्र बना सकते हैं। असम इस दिशा में आगे बढ़ चुका है, और अब पश्चिम बंगाल के लिए भी सही नीतियां अपनाकर इस अवसर का लाभ उठाने का सही समय है।”

भविष्य की चुनौतियों के लिए सेना में बड़े बदलाव जरूरी

पूर्व सेना प्रमुख ने आगाह किया कि भविष्य के युद्ध सिर्फ जमीन, समुद्र और आसमान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि साइबर स्पेस, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक और सूचना युद्ध जैसे क्षेत्र भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों को इन चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। इसके लिए केवल हथियारों का आधुनिकीकरण काफी नहीं है, बल्कि तीनों सेनाओं के बीच तालमेल, संगठनात्मक ढांचे और सैन्य रणनीति में भी बदलाव करना होगा। साथ ही, टैंक और तोपखाने जैसे पारंपरिक सैन्य प्लेटफॉर्म को ड्रोन और नेटवर्क आधारित प्रणालियों से जोड़ना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

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