रिश्तेदारों की बेनामी कंपनियों से सस्ते में विमान खरीदकर महंगे किराये पर देने और पक्षपात का आरोप
नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के पूर्व फ्लाइंग ट्रेनिंग निदेशक कैप्टन अनिल गिल और विमानन क्षेत्र से जुड़ी चार निजी कंपनियों के खिलाफ भ्रष्टाचार व पद के दुरुपयोग के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। जांच एजेंसी ने ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल, रेडबर्ड एविएशन अकादमी, सबर्स कॉरपोरेट सॉल्यूशंस और सैंडहिल्स एविएशन आईएफएससी के साथ कई अज्ञात अधिकारियों को भी आरोपी बनाया है।
सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, कैप्टन अनिल गिल ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए परिजनों के नाम पर बनाई गई कथित बेनामी कंपनियों के जरिए बेहद कम दाम में ट्रेनिंग विमान खरीदे और बाद में उन्हें रेडबर्ड एविएशन अकादमी जैसी पसंदीदा संस्थाओं को भारी किराये पर लीज पर दिया।
सस्ते में विमान खरीद और करोड़ों की लीज कमाई एफआईआर में आरोप है कि ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल ने 2020 और 2021 में दो सेसना विमान बाजार दर से काफी कम कीमत पर खरीदे। 2021 से अक्टूबर 2023 के बीच कंपनी ने अकेले रेडबर्ड एविएशन से 2.16 करोड़ रुपये से अधिक का लीज किराया हासिल किया। इसके अलावा, सबर्स कॉरपोरेट सॉल्यूशंस और सैंडहिल्स एविएशन का इस्तेमाल विमानों के वित्तपोषण और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के लिए किया गया।
नियामकीय मंजूरी में पक्षपात और रिश्तेदार की नियुक्ति जांच में सामने आया कि रेडबर्ड एविएशन अकादमी को जहां मात्र एक महीने के भीतर शुरुआती मंजूरी दे दी गई, वहीं प्रतिस्पर्धी कंपनियों के आवेदनों को महीनों तक लंबित रखा गया। इसके साथ ही, गिल की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने उनके रिश्तेदार विकास नैन को डिप्टी चीफ फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर नियुक्त किया, जिन्हें बाद में रेडबर्ड में 6.5 लाख रुपये प्रति माह के वेतन पर नौकरी मिली। सीबीआई अब इन कंपनियों और गिल के पारिवारिक बैंक खातों के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है।

