मुंबई: मुंबई क्राइम ब्रांच (Mumbai Crime Branch) ने एक ऐसे शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया है, जिसने पिछले करीब 28 वर्षों से कानून की आंखों में धूल झोंककर खुद को एक प्रतिष्ठित MBBS डॉक्टर बता रखा था। शुरुआती विधिक जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस फर्जी डॉक्टर ने जाली दस्तावेजों और फर्जी पहचान के आधार पर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए और अपने सहयोगियों के साथ मिलकर पिछले तीन वर्षों में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के नाम पर करीब 10 करोड़ रुपये के गबन को अंजाम दिया।
क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त (DCP) राज तिलक रौशन ने आधिकारिक तौर पर बताया कि गिरफ्तार आरोपी धर्मेंद्र कुमार मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और वह 12वीं कक्षा भी पास नहीं है। इसके बावजूद वह खुद को डॉक्टर बताकर जगह-जगह न केवल प्रैक्टिस करता था, बल्कि बड़े पैमाने पर मेडिकल कैंप भी आयोजित करता था।
1. बॉलीवुड हस्तियों की आड़ में ठगी और विधिक नेटवर्क
आरोपी धर्मेंद्र कुमार बेहद शातिर तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता था, जिसके मुख्य विधिक व जांच बिंदु निम्नलिखित हैं:
- बॉलीवुड कनेक्शन: आरोपी ने फिल्म इंडस्ट्री के दिहाड़ी मजूदरों (बॉलीवुड वर्कर्स) के लिए कई बड़े मेडिकल कैंप लगाए थे। इन कैंपों में ‘टॉप वन’ के कई नामचीन बॉलीवुड अभिनेता और अभिनेत्रियां भी शामिल हुए थे।
- तस्वीरों से रौब: वह इन दिग्गज बॉलीवुड हस्तियों के साथ खींची गई तस्वीरों को आम लोगों और कॉरपोरेट जगत को दिखाकर अपना रसूख जमाता था, ताकि उनका भरोसा जीतकर करोड़ों की ठगी की जा सके।
- अन्तरराज्यीय गिरोह: क्राइम ब्रांच की जांच में स्पष्ट हुआ है कि इस गिरोह का विधिक व आपराधिक नेटवर्क केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों में भी फैला हुआ है।
2. कैसे खुली पोल? फर्जी DCP के केस से जुड़ी विधिक कड़ियां
आरोपी की गिरफ्तारी की पटकथा बेहद दिलचस्प है, जिसे नीचे दी गई क्रमबद्ध तालिका से समझा जा सकता है:
| घटनाक्रम का चरण | विधिक जांच एवं कार्रवाई की कड़ियां |
|---|---|
| कड़ी 1: शुरुआती गिरफ्तारियां | करीब दो सप्ताह पहले मुंबई क्राइम ब्रांच ने तीन जालसाजों को पकड़ा था, जिनमें खुद को फर्जी DCP बताने वाला मोहम्मद गौस इब्राहिम खतीब उर्फ डॉ. राज खतीब (52) शामिल था। |
| कड़ी 2: असली DCP का समन | यह पता चलने पर कि फर्जी DCP खतीब इस फर्जी डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार के मेडिकल कैंपों में जाता था, असली DCP राज तिलक रौशन ने धर्मेंद्र को शनिवार (11 जुलाई 2026) को पूछताछ के लिए अपने केबिन में बुलाया। |
| कड़ी 3: विजिटिंग कार्ड और हकलाहट | धर्मेंद्र ने जैसे ही डीसीपी के केबिन में अपना ‘डॉक्टर’ वाला विजिटिंग कार्ड भेजा, डीसीपी रौशन ने उससे मेडिकल डिग्री को लेकर कड़े विधिक सवाल पूछे। आरोपी कोई सही जवाब नहीं दे सका और हकलाने लगा। |
3. रेड में बरामदगी और विधिक दस्तावेज
संदेह पुख्ता होते ही पुलिस ने धर्मेंद्र कुमार को विधिक रूप से हिरासत में लिया और उसके घर पर व्यापक छापेमारी (रेड) की। रेड के दौरान पुलिस को निम्नलिखित सामग्रियां बरामद हुईं:
बरामदगी एवं विधिक सबूत⎩⎨
⎧1. फर्जी पहचान पत्र:2. चिकित्सा सामग्री:3. वित्तीय दस्तावेज:’डॉ. धर्मेंद्र कुमार’ के नाम का फर्जी आईडी कार्ड, पैन कार्ड (PAN Card) और विजिटिंग कार्ड।प्रमाण पत्र और चिकित्सा से जुड़ी कई विधिक सामग्रियां, जिनका उपयोग वह रौब दिखाने के लिए करता था।महाराष्ट्र सहित कई राज्यों की कंपनियों के दस्तावेज, प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स और करोड़ों के गबन से जुड़े कागजात।
4. विश्वास की आड़ में बड़े वित्तीय अपराध का खेल
मुंबई क्राइम ब्रांच के विधिक अधिकारियों के अनुसार, आरोपी धर्मेंद्र कुमार लोगों के बीच अपना झूठा रौब और डॉक्टर होने का विधिक भरोसा कायम कर लंबे समय से धोखाधड़ी कर रहा था। एक अनपढ़ व्यक्ति द्वारा तीन दशक तक चिकित्सा क्षेत्र में सक्रिय रहना और समानांतर रूप से 10 करोड़ रुपये के कॉरपोरेट फंड का गबन करना देश के बैंकिंग और सुरक्षा तंत्र के लिए एक बड़ा सबक है। फिलहाल पुलिस आरोपी के बैंक खातों और अन्य राज्यों में फैले उसके साथियों की धरपकड़ के लिए गहन विधिक तफ्तीश कर रही है।

