भारत का समुद्री क्षेत्र जल्द ही वैश्विक नेटवर्क से जुड़ेगा। इसके लिए सिंगापुर और भारत के बीच ग्रीन एंड डिजिटल शिपिंग कॉरिडोर (जीडीएससी) शुरू करने की तैयारी है। दोनों देश इसे लेकर जल्द ही समझौते (एलओआई) पर हस्ताक्षर करने वाले हैं। माना जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की अगले सप्ताह होने वाली सिंगापुर यात्रा के दौरान यह प्रक्रिया पूरी हो सकती है।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सोनोवाल 24 से 28 मार्च तक एक प्रतिनिधिमंडल के साथ सिंगापुर मैरीटाइम वीक (एसएमडब्ल्यू) में भाग लेंगे। सिंगापुर के मैरीटाइम और पोर्ट अथॉरिटी (एमपीए) के मुख्य कार्यकारी टेओ इंग दीह ने कहा हम शुरुआत के तौर पर भारत के साथ आशय पत्र जारी करने के बारे में सोच रहे हैं। यह कुछ ऐसा है जिस पर हम अभी भी काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सिंगापुर मैरीटाइम वीक के दौरान ही एलओआई पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, मगर इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। टेओ ने कहा कि भारत इस क्षेत्र में जैव ईंधन सहित हरित ईंधन निर्यात करने के साथ-साथ डिजिटल विशेषज्ञता साझा करने का इच्छुक है। वहीं उद्योग पर्यवेक्षकों का कहना है कि जीडीएससी सिंगापुर भारतीय समुद्री क्षेत्र को वैश्विक नेटवर्क से जोड़ेगा। यह दुनिया में सबसे बड़े शिपिंग और समुद्री व्यापार केंद्रों में से एक माना गया है
सिंगापुर मैरीटाइम वीक (एसएमडब्ल्यू) में एस्टोनिया, फ्रांस, पुर्तगाल, नॉर्वे और नीदरलैंड के मंत्री भी भाग लेंगे। इसके अलावा कार्यक्रम में भारतीय बंदरगाहों, शिपयार्ड और कंपनियों द्वारा इंडिया पैविलियन प्रदर्शनी लगाई जाएगी। सिंगापुर की मैरीटाइम और पोर्ट अथॉरिटी ने बताया कि कार्यक्रम में भारतीय बंदरगाह संघ, कोचीन शिपयार्ड, भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय, भारतीय शिपयार्ड संघ, स्वान डिफेंस एंड हैवी इंडस्ट्रीज, चौगुले शिपयार्ड, गार्डन रीच शिपयार्ड और इंजीनियर्स, सैन मरीन शिपयार्ड, सिनर्जी शिप बिल्डर्स और एलएंडटी शिपयार्ड भाग ले रहे हैं।

