केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025 पेश करने के बाद अपने पहले साक्षात्कार में बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि नई कर व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये तक की आय को कर मुक्त करने के फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी तरह से सहमत थे, लेकिन इस फैसले को लागू करने में नौकरशाहों को समझाने में काफी समय लग गया।
बजट में ऐतिहासिक कर सुधार
वित्त मंत्री ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि यह ऐसा ऐतिहासिक कदम है, जो न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा बल्कि आम जनता को भी बड़ी राहत प्रदान करेगा। उनके अनुसार, यह निर्णय मध्यम वर्ग, वेतनभोगी कर्मचारियों और छोटे व्यवसायियों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।
आर्थिक सुधारों की दिशा में बड़ा कदम
सीतारमण ने कहा कि कर छूट की यह नई सीमा लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाएगी, जिससे बाजार में मांग बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस निर्णय का पूरी तरह से समर्थन किया था, क्योंकि वे चाहते थे कि आम जनता को अधिक बचत का लाभ मिले और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
नौकरशाहों को मनाने में लगा समय
हालांकि, वित्त मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि इस फैसले को अमल में लाने के लिए सरकारी अधिकारियों और नीति निर्धारकों को समझाने में काफी समय लगा। कई नौकरशाहों को संदेह था कि इतनी बड़ी कर छूट से सरकारी राजस्व पर असर पड़ेगा, लेकिन व्यापक आर्थिक प्रभावों का अध्ययन करने के बाद इसे मंजूरी दी गई।
जनता को मिलेगा बड़ा फायदा
इस फैसले से उन लाखों करदाताओं को फायदा होगा, जिनकी आय 12 लाख रुपये तक है। अब उन्हें कोई इनकम टैक्स नहीं देना पड़ेगा, जिससे उनकी आय में बचत बढ़ेगी और वे इसे अन्य आवश्यकताओं में खर्च कर सकेंगे। इससे मांग और उपभोग में वृद्धि होगी, जो देश की आर्थिक वृद्धि को और तेज करेगा।
निष्कर्ष
12 लाख तक की आय पर कर छूट का यह निर्णय सरकार की आम जनता के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की इस पहल से करदाताओं को सीधा लाभ मिलेगा और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। हालांकि, इसे लागू करने में सरकारी तंत्र को मनाने में वक्त लगा, लेकिन अंततः यह एक ऐतिहासिक कर सुधार के रूप में सामने आया है।

