नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा की कि अंतरराष्ट्रीय बिग कैट अलायंस (IBCA) अब एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन बन गया है। 3 जनवरी 2025 को यह संगठन और इसका सचिवालय आधिकारिक रूप से एक कानूनी अंतरराष्ट्रीय इकाई में बदल गया।
IBCA के गठन और समझौते की स्थिति
भारतीय विदेश मंत्रालय को इस फ्रेमवर्क समझौते का मुख्य अमानतदार (Depository) नियुक्त किया गया है। अब तक भारत, निकारागुआ, एस्वातिनी, सोमालिया और लाइबेरिया जैसे पांच देशों ने औपचारिक रूप से समझौते को मंजूरी दी है। इसके अलावा, भारत समेत 27 देशों ने इस संगठन में शामिल होने की स्वीकृति दी है।
भारत में होगा IBCA का मुख्यालय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 अप्रैल 2023 को प्रोजेक्ट टाइगर के 50 वर्ष पूरे होने के मौके पर IBCA की घोषणा की थी। इसके बाद, 29 फरवरी 2024 को केंद्रीय कैबिनेट ने इस संगठन की स्थापना को मंजूरी दी थी, जिसके तहत इसका मुख्यालय भारत में स्थापित किया गया है।
क्या है बिग कैट और इसका उद्देश्य?
IBCA का मुख्य उद्देश्य बड़ी बिल्ली प्रजाति के सात जानवरों – बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा के संरक्षण और सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
इस अभियान के तहत, संयुक्त राष्ट्र (UN) के सभी सदस्य देशों को IBCA का सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
IBCA का प्रबंधन
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी (NTCA) को IBCA का नोडल संगठन बनाया गया है, जो इसके संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी संभालेगा।
क्या होगा IBCA के माध्यम से?
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग: सदस्य देशों के बीच वन्यजीव संरक्षण को लेकर सहयोग बढ़ेगा।
- शोध और संरक्षण परियोजनाएं: इन बड़ी बिल्ली प्रजातियों पर शोध, उनके संरक्षण और प्राकृतिक आवासों की रक्षा के लिए प्रयास होंगे।
- वैश्विक साझेदारी: विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठन इस मिशन का हिस्सा बनेंगे।
निष्कर्ष
IBCA का गठन दुनिया भर में बाघों और अन्य बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए एक बड़ा कदम है। भारत, जिसने पहले से ही प्रोजेक्ट टाइगर, एशियाई शेर संरक्षण परियोजना और चीता पुनर्स्थापन परियोजना जैसी सफल पहल की हैं, अब इस अंतरराष्ट्रीय मंच के माध्यम से वैश्विक स्तर पर वन्यजीव संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

