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Monday, May 18, 2026

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पीएम मोदी का नीदरलैंड्स और स्वीडन दौरा: स्वीडन में मिला सर्वोच्च नागरिक सम्मान; डच पीएम की टिप्पणी पर भारत का कड़ा रुख

स्टॉकहोम/एम्स्टर्डम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच देशों के मौजूदा आधिकारिक दौरे के तहत नीदरलैंड्स और स्वीडन की यात्राएं कूटनीतिक और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण रही हैं। नीदरलैंड्स के बाद स्वीडन पहुंचे पीएम मोदी को वहां के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया है, वहीं डच मीडिया और सरकार की कुछ टिप्पणियों पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है।

स्वीडन में ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार’ से सम्मानित

नीदरलैंड्स का दौरा संपन्न कर स्वीडन पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीडन के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ (Royal Order of the Polar Star Commander Grand Cross) से सम्मानित किया गया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक नेतृत्व में पीएम मोदी के योगदान को रेखांकित करता है।

डच पीएम की टिप्पणी पर भारत का कूटनीतिक जवाब

पीएम मोदी के नीदरलैंड्स पहुंचने से पहले डच अखबार ‘डी फोल्क्सक्रांट’ (De Volkskrant) में वहां के प्रधानमंत्री की एक टिप्पणी प्रकाशित हुई थी, जिसमें कहा गया था कि “डच सरकार भारत में हो रहे घटनाक्रमों को लेकर चिंतित है और यह चिंता पूरे यूरोप में है।”

रविवार को भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) की प्रेस ब्रीफिंग में जब एक डच पत्रकार ने इस टिप्पणी को लेकर सवाल पूछा, तो भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट और कड़ा जवाब देते हुए कहा:

“इस तरह की टिप्पणियां दर्शाती हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और वहां की जमीनी वास्तविकताओं के बारे में लोगों में जानकारी की कमी है।”

ब्रीफिंग के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों द्वारा संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस न किए जाने पर भी सवाल उठाए गए, हालांकि दोनों देशों ने इस दौरे को बेहद सफल और ऐतिहासिक करार दिया है।

नीदरलैंड्स दौरे के बड़े और ठोस नतीजे

विवादों से इतर, पीएम मोदी की नीदरलैंड्स यात्रा आर्थिक और सांस्कृतिक मोर्चे पर बेहद फायदेमंद साबित हुई:

  1. चिप निर्माण (Semiconductor) क्षेत्र में बड़ा समझौता: दुनिया की अग्रणी सेमीकंडक्टर चिप मशीन बनाने वाली कंपनी एएसएमएल (ASML) और भारत की टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। इसके तहत गुजरात में एक उन्नत चिप मशीन फैक्ट्री का निर्माण किया जाएगा, जो भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के लिए मील का पत्थर है।
  2. चोल राजवंश की विरासत की वतन वापसी: सांस्कृतिक कूटनीति के तहत नीदरलैंड्स की लीडेन यूनिवर्सिटी ने भारत सरकार को औपनिवेशिक काल की ऐतिहासिक विरासत लौटाने की घोषणा की है। इसमें चोल वंश के समय की तांबे की अनमोल वस्तुएं शामिल हैं, जिन्हें डच ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल के दौरान बिना अनुमति के नीदरलैंड्स ले जाया गया था।

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