प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी में गंगा नदी में एक नाव पर आयोजित इफ़्तार पार्टी के दौरान मांसाहारी भोजन करने और उसका बचा हुआ कचरा नदी में फेंकने के आरोपियों को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने इस मामले में कुल 14 में से 8 अभियुक्तों को ज़मानत दे दी है, लेकिन साथ ही इस कृत्य पर गंभीर टिप्पणी भी की है।
हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी
‘बार एंड बेंच’ और ‘लाइव लॉ’ की रिपोर्ट के अनुसार, 15 मई को अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला ने अपने 16 पन्नों के आदेश में कहा:
“मौजूदा मामला मुस्लिम समुदाय के लोगों की रोज़ा इफ़्तार पार्टी से जुड़ा है। आरोप है कि इफ़्तार पार्टी के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मांसाहारी भोजन किया और उसका बचा हुआ खाना गंगा नदी में फेंक दिया। अदालत की निष्पक्ष राय में यह तथ्य हिन्दू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला माना जा सकता है।”
हालांकि, कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि अभियुक्तों ने अपने हलफनामों (शपथ पत्रों) में इस घटना को लेकर “पछतावा” व्यक्त किया है।
आठ अभियुक्तों को मिली ज़मानत
अदालत ने मामले की परिस्थितियों और अभियुक्तों के पछतावे को ध्यान में रखते हुए 15 मई को 8 लोगों की ज़मानत मंजूर की:
- जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की पीठ ने पांच अभियुक्तों को ज़मानत दी।
- जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ ने तीन अन्य अभियुक्तों को ज़मानत दी।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद वाराणसी में पवित्र गंगा नदी के बीचों-बीच नाव पर आयोजित एक इफ़्तार पार्टी के बाद शुरू हुआ था। आरोप है कि इस पार्टी में शामिल लोगों ने न केवल प्रतिबंधित क्षेत्र में मांसाहारी भोजन का सेवन किया, बल्कि बची हुई खाद्य सामग्री और कचरे को सीधे गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया, जिससे स्थानीय लोगों और हिंदू समुदाय की धार्मिक आस्था को ठेस पहुँची। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में कुल 14 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

