नई दिल्ली: देश में बढ़ती महंगाई के बीच आम आदमी की रसोई का बजट एक बार फिर पूरी तरह से बिगड़ गया है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों (Oil Marketing Companies) ने घरेलू रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये प्रति सिलेंडर की भारी बढ़ोतरी करने का एलान किया है। एलपीजी (LPG) की ये बढ़ी हुई नई दरें आज यानी 7 जून 2026 से देश भर में पूरी तरह लागू हो गई हैं। इस ताजा मूल्य संशोधन के बाद देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम ($14.2\text{ kg}$) वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से सीधे बढ़कर अब 942 रुपये के स्तर पर पहुंच गई है।
तीन महीनों में दूसरी बार बढ़े दाम; जनता पर दोहरी मार
गौरतलब है कि पिछले तीन महीनों के भीतर यह दूसरी बार है जब आम उपभोक्ताओं पर रसोई गैस की कीमतों में इजाफा कर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला गया है। इससे पहले, इसी साल 7 मार्च को प्रति घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपये की एकमुश्त बड़ी वृद्धि की गई थी। मार्च और जून के इन दोनों संशोधनों को मिला दिया जाए, तो पिछले महज 90 दिनों के भीतर रसोई गैस सिलेंडर कुल 89 रुपये तक महंगा हो चुका है, जिससे मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह चरमरा गया है।
महानगरों में घरेलू एलपीजी (14.2 kg) की नई दरें:
- दिल्ली: 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये
- नोट: देश के अन्य राज्यों और दूरदराज के क्षेत्रों में स्थानीय टैक्स (वैल्यू एडेड टैक्स – VAT) और परिवहन लागत (फ्रेट चार्ज) के आधार पर कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल सकता है।
आखिर क्यों बढ़ाए गए रसोई गैस के दाम? जानिए मुख्य वजह
पेट्रोलियम उद्योग से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, एलपीजी की कीमतों में की गई इस ताजा बढ़ोतरी के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े अंतरराष्ट्रीय और वित्तीय कारण जिम्मेदार हैं:
- पश्चिम एशिया का गंभीर संकट: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में पिछले कई महीनों से जारी तीव्र सैन्य और कूटनीतिक संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Global Energy Supply Chain) बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस भू-राजनीतिक तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) की कीमतों में लगातार रिकॉर्ड उछाल देखा जा रहा है।
- तेल कंपनियों का भारी घाटा: उद्योग सूत्रों का कहना है कि मार्च में की गई 60 रुपये की बढ़ोतरी के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र की सरकारी तेल कंपनियों को घरेलू एलपीजी की बिक्री पर भारी वित्तीय नुकसान (अंडर-रिकवरी) उठाना पड़ रहा था। ताजा रेट रिवीजन से पहले तक स्थिति यह थी कि सरकारी तेल कंपनियों को प्रत्येक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की मूल लागत के मुकाबले उसकी बिक्री पर लगभग 703 रुपये का बड़ा घाटा हो रहा था। ऐसे में कंपनियों की वित्तीय स्थिति को संतुलित रखने और लगातार बढ़ती इनपुट लागत की भरपाई के लिए कीमतों में यह इजाफा करना बेहद आवश्यक माना गया।

