नासिक: टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक कार्यालय में महिला कर्मचारी के यौन उत्पीड़न और कथित जबरन धर्म परिवर्तन के मामले में नासिक की एक अदालत ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने टीसीएस की साइट हेड और आंतरिक ‘पॉश’ (POSH) कमेटी की सदस्य अश्विनी चैनानी समेत पांचों आरोपियों की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।
अदालत ने शुक्रवार को दिए अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पीड़िता की शिकायत को नजरअंदाज करना सीधे तौर पर अपराध को बढ़ावा देने और आरोपियों का साथ देने के समान है।
इन आरोपियों की जमानत याचिका हुई खारिज:
- अश्विनी चैनानी (साइट हेड और पॉश कमेटी सदस्य)
- तौसीफ अत्तार
- रजा मेमन
- शाहरुख कुरैशी
- आसिफ अंसारी
अदालत की सख्त टिप्पणी: “पॉश सदस्य की चुप्पी ने जहरीले माहौल को बढ़ावा दिया”
शनिवार को जारी हुए अदालत के विस्तृत आदेश में जज ने अश्विनी चैनानी की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि चैनानी महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षा देने के लिए बनी आंतरिक शिकायत समिति (पॉश) की सदस्य थीं। कानूनन उन्हें पीड़िता की लिखित शिकायत दर्ज कराने में मदद करनी चाहिए थी, लेकिन इसके विपरीत उन्होंने पीड़िता की ही गलती निकालते हुए उसे आरोपियों को छोड़ देने (मामला दबाने) की सलाह दी। अदालत ने माना कि उनकी इस असंवेदनशीलता ने दफ्तर के जहरीले माहौल का समर्थन किया।
क्या हैं गंभीर आरोप?
- अश्लील टिप्पणियां और प्रताड़ना: एफआईआर (FIR) के अनुसार, आरोपी रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी पीड़िता के साथ जबरन नजदीकी बढ़ाने का प्रयास करते थे। वे उसे हल करने के लिए पहेलियां देते, निजी व शर्मनाक सवाल पूछते और अश्लील टिप्पणियां करते थे। दफ्तर के इस प्रताड़ना भरे माहौल से तंग आकर पीड़िता को मार्च 2026 में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
- जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव: मामले की जांच कर रही नासिक पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) के सामने कुछ अन्य पीड़ितों ने भी गंभीर खुलासे किए हैं। आरोपों के मुताबिक, कर्मचारियों को नमाज पढ़ने, खान-पान की आदतें बदलने और धार्मिक प्रतीकों को अपनाने जैसे इस्लामी तौर-तरीके मानने के लिए भी मजबूर किया जा रहा था।
कोर्ट ने खारिज कीं बचाव पक्ष की दलीलें
बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी थी कि अश्विनी चैनानी मुख्य रूप से पुणे ब्रांच से काम करती थीं और नासिक के रोजमर्रा के कामों में सीधे शामिल नहीं थीं। साथ ही शिकायत दर्ज कराने में देरी और लिखित शिकायत न होने का तर्क भी दिया गया।
अदालत ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि शिकायत में देरी के लिए पीड़िता को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि उसने पॉश सदस्य को समय रहते मौखिक रूप से पूरी जानकारी दे दी थी।
प्रभावशाली हैं आरोपी, गवाहों को मिल सकती है धमकी
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि चैनानी ने कथित तौर पर मुख्य आरोपियों का साथ दिया। चूंकि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपी काफी प्रभावशाली पदों पर हैं, इसलिए उन्हें जमानत देने से गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों से छेड़छाड़ का गंभीर खतरा है। फिलहाल एसआईटी (SIT) इस इकाई में उत्पीड़न के ऐसे ही नौ अन्य मामलों की गहनता से जांच कर रही है।

