नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के परीक्षा परिणामों को लेकर देश में एक नया बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीबीएसई के परीक्षा परिणामों में ‘भयंकर हेर-फेर’ का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने इस पूरे विवाद के लिए केंद्र सरकार और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी डिजिटल सेवाएं देने वाली कंपनी ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ (Coempt Edutech) को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, सीबीएसई ने राहुल गांधी के इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह गलत, भ्रामक और तथ्यों से परे बताया है।
छात्र वेदांत श्रीवास्तव की आंसर शीट से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि हाल ही में सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने सीबीएसई 12वीं कक्षा के छात्र वेदांत श्रीवास्तव के मामले से जुड़ी है। वेदांत ने आरोप लगाया था कि री-इवैल्यूशन (पुनर्मूल्यांकन) प्रक्रिया के दौरान डाउनलोड की गई फिजिक्स की स्कैन आंसर शीट उसकी नहीं, बल्कि किसी अन्य छात्र की थी। बाद में सीबीएसई ने इस तकनीकी चूक को स्वीकार किया और स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि छात्र को उसकी सही आंसर शीट भेज दी गई है।
इसी घटना का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने अपने एक्स (ट्विटर) हैंडल पर लिखा, “सीबीएसई परीक्षा परिणाम में भयंकर हेर-फेर हुई है, जिससे देश के लाखों बच्चे और उनके माता-पिता गहरे सदमे में हैं।”
कंपनी के इतिहास और ‘बैकग्राउंड चेक’ पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ कंपनी के अतीत पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि यह कंपनी पहले ‘ग्लोबारिना’ (Globarina) के नाम से जानी जाती थी, जो साल 2019 में तेलंगाना में भी इसी तरह के परीक्षा विवादों में घिरी रही थी। कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि इस कंपनी का पुराना विवादित इतिहास जानने के बावजूद इसका “बैकग्राउंड चेक” क्यों नहीं किया गया? उन्होंने नियमों और प्रक्रियाओं को दरकिनार कर इस कंपनी को ठेका सौंपने के पीछे के कारणों और केंद्र सरकार व कंपनी प्रबंधन के बीच संबंधों को उजागर करने की मांग की।
स्वतंत्र न्यायिक जांच और एसआईटी गठन की मांग
छात्रों की निराशा और पूर्व में हुए नीट (NEET) पेपर लीक जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच और एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की पुरजोर मांग की है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए लिखा, “नाम बदला- पर नीयत वही, फितरत वही। इतिहास सबको पता था, फिर भी ठेका दिया गया। ऐसी विवादित कंपनी के हाथों में देश के 18.5 लाख बच्चों का भविष्य सौंप दिया गया और सरकार में बैठे किसी भी व्यक्ति को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा।” इस राजनीतिक घमासान के बाद देश के छात्र और अभिभावक अब पूरे मामले पर नजरें गड़ाए हुए हैं।

