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Monday, July 27, 2026

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महाराष्ट्र में ‘हिंदुत्व’ पर आर-पार: उद्धव ठाकरे ने शुरू किया ‘राम रक्षा’ आंदोलन, दिया ‘BJP-मुक्त राम’ का नारा; देवेंद्र फडणवीस का करारा पलटवार

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में ‘हिंदुत्व’ के विधिक व वैचारिक उत्तराधिकार को लेकर संघर्ष एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार (5 जुलाई 2026) को अयोध्या राम मंदिर निर्माण में लगे कथित चंदा घोटाले (Donation Scam) को विधिक व राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए अपना राज्यव्यापी ‘राम रक्षा’ आंदोलन शुरू कर दिया है।

मध्य मुंबई के दादर स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर के बाहर एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि आज जो लोग हिंदुत्व के नाम पर सत्ता में बैठे हैं, वही हिंदुओं को विधिक व आर्थिक रूप से लूट रहे हैं।

1. हनुमान चालीसा और राम रक्षा स्तोत्र के पाठ से शुरुआत

उद्धव ठाकरे ने अपने इस नए आंदोलन की शुरुआत पूरी तरह पारंपरिक और धार्मिक विधा से की:

  • मंत्रोच्चार और पाठ: रैली मंच पर जाने से पहले ठाकरे ने कार्यकर्ताओं के साथ ‘हनुमान स्तोत्र’, ‘हनुमान चालीसा’ और ‘राम रक्षा स्तोत्र’ का सामूहिक पाठ किया।
  • निष्पक्ष जांच की विधिक मांग: पाठ के तुरंत बाद उन्होंने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के भू-सौदों और चंदे में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं की एक स्वतंत्र विधिक जांच कराने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि किसी लुटेरे से उसी की लूट की जांच नहीं कराई जा सकती, वरना सबको विधिक क्लीन चिट मिल जाएगी।

2. ‘BJP-मुक्त राम’ का नारा और 12 वर्षों का हिसाब

उद्धव ठाकरे के संबोधन के मुख्य राजनीतिक व वैचारिक बिंदुओं को नीचे दिए गए विवरण से समझा जा सकता है:

उद्धव ठाकरे के भाषण की विधिक व वैचारिक कड़ियां⎩⎧​नया नारा:अटल जी का संदर्भ:भगवा सरकार पर तंज:आंदोलन का विस्तार:​भगवान राम किसी एक राजनीतिक दल की बपौती नहीं हैं, अब **’BJP-मुक्त राम’** की जरूरत है।अटल बिहारी वाजपेयी कहते थे कि अब हिंदुओं की पिटाई नहीं होगी, पर आज स्वघोषित रक्षक ही शोषक बन गए हैं।”पिछले 12 वर्षों तक (2014 से 2026) हमें लगा कि देश में हमारी भगवा सरकार है, लेकिन असल में हिंदुओं को ठगा गया।” ठाकरे ने शिवसैनिकों को इस ’राम रक्षा’ आंदोलन को महाराष्ट्र के गांव-गांव तक ले जाने का विधिक निर्देश दिया।​

3. देवेंद्र फडणवीस का पलटवार: “राम का रास्ता छोड़ने से हुआ पतन”

उद्धव ठाकरे के इन गंभीर आरोपों पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गढ़चिरौली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बेहद तल्ख और विधिक रूप से घेराबंदी करने वाला पलटवार किया:

  • देर आए दुरुस्त आए: फडणवीस ने तंज कसते हुए कहा, “मुझे बेहद खुशी है कि उद्धव ठाकरे को आखिरकार भगवान राम की याद आ गई। हमारी तो बस यही इच्छा थी कि उन्हें राम याद आएं।”
  • पार्टी के विभाजन का विधिक कारण: फडणवीस ने आगे कहा कि उद्धव जी ने सत्ता के लालच में राम का वैचारिक रास्ता छोड़ दिया था, इसीलिए उनकी मूल पार्टी का विधिक व राजनीतिक पतन हुआ। अगर वे अब भी सच्चे मन से राम के मार्ग पर चलते हैं, तो यह उनके लिए अच्छा होगा। मुझे उम्मीद है कि वे सिर्फ आज राजनीति के लिए नहीं, बल्कि हर दिन ‘राम रक्षा’ का पाठ करेंगे।

4. पृष्ठभूमि: हिंदुत्व के मुद्दे पर बंटी थी शवसेन
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में अविभाजित शिवसेना ने बीजेपी से अपना पुराना विधिक गठबंधन तोड़कर वैचारिक रूप से विपरीत कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार बनाई थी। तभी से बीजेपी लगातार उद्धव ठाकरे पर सत्ता के लिए ‘हिंदुत्व’ को छोड़ने का विधिक व राजनीतिक आरोप लगाती रही है। यही वैचारिक असंतोष जून 2022 में एकनाथ शिंदे की ऐतिहासिक बगावत का मुख्य विधिक आधार बना था, जिसके कारण शिवसेना दो फाड़ हो गई थी और ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब 2026 के आगामी चुनावों से ठीक पहले, ठाकरे इसी ‘राम रक्षा’ आंदोलन के जरिए अपने खोए हुए पारंपरिक हिंदू वोट बैंक को वापस पाने की विधिक कशमकश में जुट गए हैं।

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