हैदराबाद/नई दिल्ली: ओमान के तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान भारतीय क्रू (चालक दल) वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमले और उसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत के मामले ने अब देश के भीतर एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। एआईएमआईएम (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस त्रासदी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की विदेश नीति पर बेहद तीखा और सीधा हमला बोला है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि केंद्र की सत्ता में बैठे लोगों के पास उत्सव और जश्न मनाने का तो पूरा समय है, लेकिन अमेरिकी सेना की इस घातक कार्रवाई में मारे गए निर्दोष भारतीय नागरिकों की मौत पर अमेरिका की खुले तौर पर निंदा करने की हिम्मत नहीं है।
उत्सव मनाने का समय है, पर देश के नागरिकों की हत्या पर निंदा का नहीं: ओवैसी
सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट साझा करते हुए केंद्र सरकार को देश की सीमाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा के मोर्चे पर विफल बताया। ओवैसी ने लिखा, “दुनिया के किसी भी कोने में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी भी चुनी हुई सरकार का पहला और सबसे पवित्र संवैधानिक कर्तव्य होता है। यह बेहद दुखद, शर्मनाक और गहरी चिंता का विषय है कि अमेरिकी सेना द्वारा हमारे तीन नागरिकों की जान लेने के बावजूद भारत सरकार की ओर से कोई कड़ी और सार्वजनिक प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली है।” उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री को कटघरे में खड़ा करते हुए आगे लिखा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि देश के प्रधानमंत्री के पास अपने राजनीतिक उत्सव और आयोजन मनाने का पूरा समय है, लेकिन तीन-तीन भारतीयों की निर्मम हत्या पर अमेरिकी सेना की आधिकारिक और पुरजोर निंदा करने का समय नहीं है। भारतीयों की जान बचाना सरकार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए, न कि वैश्विक ताकतों के सामने मूकदर्शक बने रहना।
रूस में फंसे युवा, चीन और गलवान का मुद्दा उठाकर विदेश नीति को घेरा
असदुद्दीन ओवैसी ने अपने आरोपों के दायरे को बढ़ाते हुए मोदी सरकार की संपूर्ण सुरक्षा रणनीति और वैश्विक साख पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार पर विफलता के संगीन आरोप लगाए:
- भारतीय नाविकों की सुरक्षा: ओवैसी ने दावा किया कि मोदी सरकार बार-बार अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र और समुद्री व्यापार मार्गों (Sea Lanes) पर काम करने वाले लाखों भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में बुरी तरह विफल साबित हुई है।
- रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे युवा: उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी शक्तिशाली रूस की सेना में भारत के गरीब युवाओं को धोखे से सैनिकों (मर्cenaries) के रूप में भर्ती किया जा रहा है। वहां अग्रिम मोर्चे पर उनकी मौत की खबरें लगातार सामने आती हैं, लेकिन हमारी सरकार इस गंभीर मानव तस्करी को रोकने और रूस के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने में पूरी तरह असहाय और लाचार नजर आती है।
- चीन और गलवान गतिरोध: इसके अलावा ओवैसी ने पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan Valley) में चीन के साथ जारी गतिरोध और सीमा विवाद का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार चीन का नाम लेने तक से बचती है, जो उसकी कमजोर रक्षा और विदेश नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
क्या है ओमान तट के पास हुआ यह गंभीर सैन्य हादसा?दरअसल, भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि की है कि पिछले चार दिनों के दौरान ओमान तट के पास अमेरिकी सेना की तीव्र कूटनीतिक और सैन्य कार्रवाई के चलते भारतीय क्रू सदस्यों वाले तीन विशाल व्यापारिक जहाज सीधे तौर पर प्रभावित (Hit) हुए हैं। इस सैन्य एक्शन के दौरान हुए एक भीषण धमाके में तीन भारतीय नागरिकों की दुखद मौत होगई, जबकि कई नाविक लापता हैं।इस घटना पर भारत ने राजनयिक माध्यमों से अमेरिका के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव ने नई दिल्ली में अमेरिकी राजनयिक को तलब (Summon) कर कड़ी आपत्ति जताई है और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षित, निर्बाध नौवहन (Free Navigation) सुनिश्चित करने की मांग की है। हालांकि, विपक्ष का मानना है कि केवल बंद कमरों में विरोध जताने के बजाय भारत सरकार को इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए।

