कोलकाता/बहरामपुर: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को मिली अप्रत्याशित और करारी शिकस्त के बाद राज्य की राजनीति में एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। सियासी गलियारों में यह अटकलें बेहद तेज हो गई हैं कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब सूबे की राजनीति से इतर राष्ट्रीय राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए देश की संसद (लोकसभा) का रुख कर सकती हैं। राजनीतिक सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक, ममता बनर्जी के लिए मुर्शिदाबाद जिले की हाई-प्रोफाइल बहरामपुर लोकसभा सीट को सबसे सुरक्षित और प्रमुख विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
सौरव गांगुली बने ‘दूत’! यूसुफ पठान ने किया इस्तीफे से इनकार?
राजनीतिक हलकों में चल रही बेहद सनसनीखेज चर्चाओं के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने ममता बनर्जी की संभावित संसदीय पारी को सुरक्षित करने के लिए बहरामपुर के वर्तमान टीएमसी सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेटर यूसुफ पठान तक सीट खाली करने का एक गोपनीय संदेश भिजवाया है। सूत्रों का दावा है कि इस संदेश को पहुंचाने के लिए भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को माध्यम (दूत) बनाया गया था, जिन्होंने यूसुफ पठान से इस सिलसिले में बात की।
हालांकि, अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पूर्व ऑलराउंडर यूसुफ पठान ने फिलहाल अपनी इस जीती हुई सीट से इस्तीफा देने और इसे खाली करने से साफ इनकार कर दिया है। यूसुफ का मानना है कि वे वर्तमान में अपने संसदीय क्षेत्र की जनता के बीच रहकर अपना राजनीतिक आधार मजबूत कर रहे हैं और वे कार्यकाल के बीच में सीट छोड़ने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं। यद्यपि इन दावों की किसी भी स्तर पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और यूसुफ पठान ने भी सार्वजनिक रूप से पार्टी या ममता बनर्जी के खिलाफ कोई बयान जारी नहीं किया है।
आखिर ममता बनर्जी के लिए बहरामपुर सीट ही क्यों है पहली पसंद?
टीएमसी के भीतर चल रही अनौपचारिक चर्चाओं में बहरामपुर सीट का नाम सबसे आगे आने के पीछे कई मजबूत और ठोस रणनीतिक कारण हैं:
- सुरक्षित सामाजिक समीकरण: मुर्शिदाबाद जिले की बहरामपुर लोकसभा सीट एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है, जिसे टीएमसी के अल्पसंख्यक वोट बैंक के लिहाज से सबसे सुरक्षित किला माना जाता है।
- अधीर रंजन चौधरी को दी थी मात: साल 2024 के लोकसभा चुनाव में इसी सीट पर तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर उतरकर यूसुफ पठान ने कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद अधीर रंजन चौधरी को करीब 85 हजार वोटों के भारी अंतर से हराकर इतिहास रचा था।
- मजबूत सांगठनिक ढांचा: हालिया विधानसभा चुनाव में राज्यभर में एंटी-इंकंबेंसी होने के बावजूद इस क्षेत्र में टीएमसी का सांगठनिक आधार और प्रदर्शन बाकी जगहों की तुलना में काफी बेहतर रहा है।
कयासों के दौर के बीच नई रणनीति पर नजर
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी को राष्ट्रीय पटल पर विपक्ष के एक मजबूत चेहरे के रूप में बनाए रखने के लिए टीएमसी को उन्हें लोकसभा में भेजना ही होगा। फिलहाल यह पूरा मामला शुरुआती चर्चाओं, कूटनीतिक संदेशों और राजनीतिक कयासों के स्तर पर है। आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक घटनाक्रम, उपचुनावों की स्थिति और ममता बनर्जी का अपना अंतिम फैसला ही इस पूरे सस्पेंस की दिशा तय करेगा।

