30.2 C
Mumbai
Wednesday, June 17, 2026

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

‘पिछले 15 वर्षों से बंगाल विधानसभा को लोकतांत्रिक ढंग से नहीं चलने दिया गया’: सर्वदलीय बैठक के बाद ममता बनर्जी पर बरसे नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा के आगामी बजट सत्र से ठीक पहले आयोजित हुई सर्वदलीय (All-Party) और बिजनेस एडवाइजरी (BA) कमेटी की बैठक बेहद हंगामेदार रही। इस हाई-प्रोफाइल बैठक के तुरंत बाद, तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित और विधानसभा में नए नेता प्रतिपक्ष (LoP) ऋतब्रत बनर्जी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। ऋतब्रत बनर्जी ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों के दौरान पश्चिम बंगाल विधानसभा को उस लोकतांत्रिक गरिमा और स्थापित परंपराओं के साथ चलने ही नहीं दिया गया, जैसी भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था रही है। उन्होंने साफ कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाकर या उन्हें विधायी प्रक्रिया से बाहर रखकर कोई भी लोकतंत्र कभी आगे नहीं बढ़ सकता।

कामकाजी दिनों के मामले में देश में सबसे फिसड्डी रहा बंगाल: बनर्जी

नेता प्रतिपक्ष ने विधायी आंकड़ों का हवाला देते हुए राज्य की पूर्ववर्ती और वर्तमान व्यवस्था को कड़े विधिक कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा:

  • राष्ट्रीय औसत से नीचे: पिछले 15 वर्षों के आधिकारिक आंकड़ों को देखें तो कामकाजी दिनों (Working Days) के मामले में पश्चिम बंगाल विधानसभा पूरे देश में सबसे आखिरी पायदान पर रही है। हमारा विधायी कामकाज राष्ट्रीय औसत (National Average) से भी काफी नीचे चल रहा है।
  • दिन बढ़ाने की मांग: हमने सर्वदलीय बैठक में सरकार और माननीय स्पीकर के सामने यह मांग पुरजोर तरीके से रखी है कि इस निराशाजनक स्थिति को तुरंत बदला जाए। लोकतंत्र को जीवंत रखने के लिए सदन के कामकाजी दिनों की संख्या बढ़ाना विधिक रूप से बेहद जरूरी है।

लोकतंत्र में ‘एकालाप’ नहीं ‘संवाद’ जरूरी; चर्चा के लिए मिला 50% समय
ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि आगामी बजट सत्र में विभिन्न जनहित के मुद्दों पर व्यापक बहस के लिए विपक्ष ने सरकार से अधिकतम समय आवंटित करने की मांग की थी। लंबे गतिरोध के बाद सरकार ने विपक्ष को आश्वासन दिया है कि:

  1. राज्यपाल के अभिभाषण पर: कुल छह (6) घंटे की विस्तृत चर्चा होगी।
  2. राज्य बजट पर: कुल दस (10) घंटे की विधायी बहस आयोजित की जाएगी।

  3. इसके साथ ही, पूरे सत्र के दौरान विपक्ष को अपनी बात और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 50 फीसदी ($50\%$) का समय आवंटित किया जाएगा। बनर्जी ने इस विधिक सहमति का स्वागत करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के लिए एक स्वस्थ संकेत है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार अपने इन वादों से पीछे हटी, तो विपक्ष सदन के भीतर कड़ा और ऐतिहासिक विरोध दर्ज कराएगा, क्योंकि लोकतंत्र ‘एकालाप’ (Monologue) से नहीं, बल्कि ‘संवाद’ (Dialogue) से चलता है।

‘व्यक्ति पूजा’ के खिलाफ 20 सांसदों का सामूहिक संघर्ष

तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी लोकसभा सांसदों द्वारा त्रिपुरा की ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में किए गए तकनीकी विलय पर भी ऋतब्रत बनर्जी ने अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) ओम बिरला ने इस विलय पर अभी तक अपना अंतिम कानूनी निर्णय नहीं सुनाया है और वे अध्यक्ष की विधिक प्रक्रिया पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।

हालांकि, उन्होंने राजनीतिक संदेश देते हुए कहा कि दो-तिहाई ($2/3$) से अधिक सांसदों ने अपनी स्वेच्छा से यह बड़ा फैसला लिया है। यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति के अहंकार या ‘व्यक्ति पूजा’ (Personality Cult) के खिलाफ उनका एक सामूहिक और वैचारिक संघर्ष है, जिसे वे सब मिलकर आगे बढ़ाएंगे।

‘हार स्वीकार न करना ममता बनर्जी का खतरनाक डिनायल मोड’

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा भवानीपुर विधानसभा चुनाव के हालिया नतीजों को कलकत्ता हाई कोर्ट में कानूनी चुनौती दिए जाने पर नेता प्रतिपक्ष ने बेहद तीखा तंज कसा। ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, “जब आप चुनाव जीतते हैं तो पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था, ईवीएम और चुनाव आयोग ठीक होता है, लेकिन जैसे ही जनता आपको हरा देती है, तो सब कुछ गलत हो जाता है। यह तानाशाही मानसिकता लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है।”

उन्होंने अंत में कहा कि राजनीति में हार-जीत एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और शीर्ष नेताओं को हर हाल में जनता के जनादेश (Mandate) का सम्मान करना चाहिए। चुनाव हारने के बाद भी खुद को जबरन विजेता सिद्ध करना एक खतरनाक ‘डिनायल मोड’ (Denial Mode) है, जो अंततः लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख को भारी नुकसान पहुंचाता है।

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here