‘पीछे सक्रिय थीं कट्टरपंथी ताकतें’; इधर दिल्ली सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस वापस लेने के दिए आदेश
कोलकाता:
बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन को लेकर एक अहम बयान दिया है। कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन की क्लिप देखकर उन्हें बांग्लादेश के जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन की याद आ गई।
तस्लीमा नसरीन के अनुसार, बांग्लादेश के उस आंदोलन का परिणाम बेहद भयावह रहा था और बाद में यह बात स्पष्ट हुई कि उसके पीछे कट्टरपंथी और जिहादी ताकतें सक्रिय थीं।
तस्लीमा नसरीन का बयान: ‘तस्वीरें एक जैसी, लेकिन संदर्भ अलग’
- बांग्लादेश आंदोलन से तुलना: तस्लीमा नसरीन ने बताया कि उन्होंने सीजेपी (CJP) द्वारा आयोजित छात्र आंदोलन का वीडियो देखा था। इससे पहले 24 जुलाई को भी उन्होंने जंतर-मंतर के दृश्यों की तुलना बांग्लादेशी घटनाक्रम से की थी।
- स्थिति पर स्पष्टीकरण: उन्होंने साफ किया कि वे दोनों देशों के आंदोलनों को पूरी तरह एक समान नहीं बता रही हैं, लेकिन जिस तरह से तस्वीरें सामने आईं, उससे उन्हें बांग्लादेश के उस घटनाक्रम की याद आई जिसके पीछे कट्टरपंथी तत्व काम कर रहे थे।
दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: प्रदर्शनकारी छात्रों को मिलेगी राहत
दूसरी ओर, दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने 29 जुलाई को एक आधिकारिक आदेश जारी कर प्रदर्शनकारी छात्रों को बड़ी राहत दी है:
- मामलों की समीक्षा और रिहाई: सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के निर्देशों के आलोक में, हालिया प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा कर उनकी रिहाई की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
- आपराधिक रिकॉर्ड वालों को छूट नहीं: गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन व्यक्तियों का पूर्व में आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, उन्हें इस राहत नीति का लाभ नहीं मिलेगा। दिल्ली पुलिस के अनुसार इस आंदोलन से जुड़ी 13 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थीं।
37 दिनों का आंदोलन और सरकार का रुख
उल्लेखनीय है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बैनर तले जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक लगातार प्रदर्शन चला था। इस दौरान नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले के विरोध में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी।
आंदोलन के समापन के बाद सरकार ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पीड़ित परिवारों को मुआवजे और निर्दोष प्रदर्शनकारियों पर से एफआईआर वापस लेने जैसी मांगों पर सहमति व्यक्त की थी।

