‘आशंका के आधार पर आदेश नहीं दिया जा सकता’, अदालत ने दोनों पक्षों से मांगा हलफनामा
कोलकाता: कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की उस याचिका पर कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित दफ्तर से ‘अनधिकृत’ होर्डिंग और नामपट्टिका हटाए जाने की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। कोलकाता नगर निगम (KMC) ने दक्षिण कोलकाता के 9-कैमैक स्ट्रीट स्थित परिसर से यह होर्डिंग गुरुवार को हटा दिया था।
याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर अंतरिम आदेश पारित करने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता है।
‘अंतरिम चरण में अंतिम राहत देना कानून सम्मत नहीं’ अदालत ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता द्वारा नामपट्टिका को तत्काल प्रभाव से पुनः लगाने की मांग समय से पहले की गई मांग है। अदालत के अनुसार, प्रारंभिक चरण में ऐसी अनुमति देना मामले में अंतिम राहत देने के समान होगा, जिसकी अनुमति स्थापित कानूनी प्रक्रिया में नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने होर्डिंग हटाने की कार्रवाई में शामिल नगर निगम और पुलिस अधिकारियों के व्यक्तिगत विवरण सार्वजनिक करने की टीएमसी की मांग को भी खारिज कर दिया।
कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग भी खारिज न्यायमूर्ति बसु चौधरी ने कैमैक स्ट्रीट स्थित परिसर के खिलाफ नगर निगम को भविष्य में किसी भी कार्रवाई से रोकने की अंतरिम अर्जी को अस्वीकार करते हुए कहा कि कानून में मात्र आशंकाओं के आधार पर कोई निषेधाज्ञा या रोक आदेश जारी नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता और सभी प्रतिवादियों को अपने-अपने पक्ष में औपचारिक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई तय की जाएगी।
होर्डिंग हटाने के दौरान हुआ था हंगामा गौरतलब है कि गुरुवार को कैमैक स्ट्रीट कार्यालय परिसर से कथित अनधिकृत होर्डिंग हटाने के दौरान सुरक्षाकर्मियों, पार्टी समर्थकों और नगर निगम व पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली थी। हालांकि मौके पर उपस्थित टीएमसी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने सुरक्षाकर्मियों द्वारा विरोध किए जाने के दावों को खारिज करते हुए कहा था कि वे केवल प्रवेश द्वार पर नियमित ड्यूटी पर तैनात थे।

