सिरियम के आंकड़ों में खुलासा: सीट क्षमता की तुलना में तेजी से घटे यात्री, ब्रिटिश एयरवेज और वर्जिन अटलांटिक को हुआ मुनाफा
नई दिल्ली: पिछले वर्ष अहमदाबाद में हुए विमान हादसे के बाद से राष्ट्रीय विमानन कंपनी एअर इंडिया के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, विशेषकर भारत-ब्रिटेन (India-UK) मार्ग पर यात्रियों का भरोसा बनाए रखना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। वैश्विक विमानन विश्लेषण फर्म सिरियम (Cirium) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस व्यस्त रूट पर एअर इंडिया की उपलब्ध सीट क्षमता की तुलना में वास्तविक यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
महीने-दर-महीने आंकड़ों में लगातार गिरावट सिरियम के आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि हादसे के बाद के महीनों में एयरलाइन की यात्री वृद्धि दर लगातार नकारात्मक दायरे में रही:
- जून 2025: भारत-ब्रिटेन मार्ग पर एअर इंडिया की सीट क्षमता में सालाना आधार पर 28.6% की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि यात्रियों की संख्या केवल 14.8% बढ़ी।
- जुलाई: सीट क्षमता में 13.3% की वृद्धि हुई, लेकिन यात्रियों की संख्या में महज 2.2% का ही इजाफा देखा गया।
- अगस्त: एयरलाइन ने अपनी सीट क्षमता में 3.9% की कटौती की, जबकि यात्रियों की तादाद में 12% की भारी कमी आई।
- सितंबर: सीट क्षमता 3.5% घटी और यात्रियों की संख्या में 19.2% की भारी गिरावट दर्ज की गई।
- अक्टूबर: क्षमता में मामूली 0.4% की बढ़ोतरी के बावजूद यात्रियों की संख्या 14.3% घट गई।
विदेशी एयरलाइंस को मिला सीधा फायदा एअर इंडिया के घटते यात्री आधार के विपरीत, इसी मार्ग पर उड़ान भरने वाली प्रतिद्वंद्वी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को सीधा लाभ मिलता दिखा है। ब्रिटिश एयरवेज और वर्जिन अटलांटिक की यात्री वृद्धि दर उनकी सीट क्षमता के मुकाबले काफी तेज रही:
- जुलाई: दोनों एयरलाइंस की संयुक्त सीट क्षमता में केवल 0.6% की वृद्धि हुई, जबकि उनके यात्रियों की संख्या 10% तक बढ़ गई।
- अगस्त: क्षमता में 3.3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि यात्री संख्या में 14.5% का उछाल आया।
विश्लेषकों का मानना है कि पिछले वर्ष हुए हादसे के बाद यात्रियों की प्राथमिकता में आए बदलाव और सुरक्षा से जुड़े संशयों के चलते इस रूट पर प्रतिस्पर्धी विमानन कंपनियों की मांग में इजाफा हुआ है।

