गृह मंत्रालय के निर्देश के 15 दिन बाद हुआ अमल, कैडर अधिकारियों ने ली राहत की सांस
नई दिल्ली: ‘सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) बिल-2026’ के प्रावधानों के खिलाफ सोशल मीडिया पर खुलकर असंतोष व्यक्त करने वाले देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल ‘सीआरपीएफ’ के वरिष्ठ उप महानिरीक्षक (डीआईजी) बीसी पात्रा का निलंबन रद्द कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद मंगलवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) मुख्यालय ने औपचारिक आदेश जारी कर डीआईजी पात्रा को सेवा में बहाल कर दिया है। हालांकि, मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच पूर्ववत जारी रहेगी।
गृह मंत्रालय के आदेश को लागू करने में देरी पर सवाल विभागीय सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के प्रशासनिक एवं कैडर नियंत्रण प्राधिकारी यानी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 28 अगस्त को ही डीआईजी पात्रा का निलंबन वापस लेने की आधिकारिक स्वीकृति दे दी थी। इसके बावजूद सीआरपीएफ प्रशासन को इस निर्णय को धरातल पर लागू करने और आधिकारिक बहाली आदेश जारी करने में करीब 15 दिनों का अतिरिक्त समय लग गया। इस आदेश के सामने आने के बाद केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के हजारों सेवारत और सेवानिवृत्त कैडर अधिकारियों ने गहरी राहत व्यक्त की है।
बिल के विरोध और अफसरों की प्रताड़ना का आरोप गौरतलब है कि राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) से प्रतिनियुक्ति पूरी कर लौटने के बाद डीआईजी बीसी पात्रा को त्रिपुरा में तैनात किया गया था, जहां जून माह में उन्हें निलंबित कर प्रारंभिक जांच बिठा दी गई थी। इसी दौरान कई अन्य वरिष्ठ कैडर अधिकारियों का भी अचानक तबादला कर दिया गया था। अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने उस समय गंभीर आरोप लगाया था कि प्रस्तावित बिल को भेदभावपूर्ण बताते हुए आवाज उठाने और कैडर हितों के लिए अदालत जाने के कारण अधिकारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है। हालांकि, बल मुख्यालय ने तब इन सभी प्रशासनिक कदमों और तबादलों को नियमित परिचालन आवश्यकता बताया था।

