पूर्व ग्रुप एमडी सतीश सेठ और अज्ञात अधिकारियों पर भी केस, गलत जानकारी देकर निवेश कराने का आरोप
नई दिल्ली: वित्तीय अनियमितताओं और कॉरपोरेट धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों को लेकर रिलायंस कैपिटल लिमिटेड और उसके पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को 2,684.57 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाने के कथित मामले में एक नियमित आपराधिक प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है। इस मामले में अनिल अंबानी, कंपनी के पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर सतीश सेठ और कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों व अन्य संबंधित व्यक्तियों को नामजद किया गया है।
एलआईसी की लिखित शिकायत पर केंद्रीय एजेंसी का कड़ा एक्शन सीबीआई द्वारा यह बड़ी कानूनी कार्रवाई देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी की ओर से सौंपी गई औपचारिक लिखित शिकायत के आधार पर की गई है। शिकायत में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया है कि रिलायंस कैपिटल के शीर्ष प्रबंधन ने सोची-समझी साजिश के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थान के साथ धोखाधड़ी को अंजाम दिया। हालांकि, एफआईआर दर्ज होने के बाद अनिल अंबानी अथवा उनके आधिकारिक प्रवक्ता की तरफ से इस विषय पर तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन वे पूर्व में हमेशा किसी भी प्रकार के गलत वित्तीय आचरण से इनकार करते रहे हैं।
3,900 करोड़ के डिबेंचर निवेश में हेरफेर का गंभीर आरोप सीबीआई की शुरुआती जांच के अनुसार, एलआईसी ने 12 अप्रैल 2012 से 9 मार्च 2018 के दौरान रिलायंस कैपिटल द्वारा जारी पांच नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी) में कुल 3,900 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया था। यह पूंजी कंपनी की सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों, नियमित फंडिंग और पुराने कर्जों को चुकाने के उद्देश्य से लगाई गई थी। एलआईसी का आरोप है कि आरोपियों ने कथित तौर पर भ्रामक और गलत वित्तीय जानकारियां देकर संस्थान को निवेश के लिए प्रेरित किया। इसके बाद निवेश के नियमों और शर्तों का उल्लंघन करते हुए इन सार्वजनिक पैसों को कथित तौर पर अन्यत्र स्थानांतरित (डायवर्ट) कर दिया गया, जिसके चलते एलआईसी को 2,684.57 करोड़ रुपये का शुद्ध वित्तीय घाटा उठाना पड़ा। एजेंसी अब धन के हेरफेर से जुड़े सभी बैंक लेन-देन और दस्तावेजों की सघन जांच में जुट गई है।

