मणिपुर में जारी हिंसा पर काबू पाने और राज्य में पूरी तरह शांति बहाल करने के लिए सुरक्षा बलों ने एक बड़ा और व्यापक मिशन शुरू किया है। उग्रवादियों का सरेंडर कराने, अवैध हथियारों की भारी जब्ती करने और उपद्रवियों द्वारा बनाए गए अवैध बंकरों व एम्बुश (घात लगाने वाले) प्वाइंट्स को पूरी तरह खत्म करने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 200 कंपनियों को विशेष ट्रेनिंग दी गई है। इसके साथ ही, जंगल वॉरफेयर (जंगलों में लड़ने) की कला में बेहद निपुण सीआरपीएफ की दो विशेष ‘कोबरा’ (CoBRA) बटालियनों को मणिपुर के विभिन्न रणनीतिक हबों पर छोटे-छोटे समूहों में तैनात कर दिया गया है।
सीआरपीएफ के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक, मणिपुर में शांति बहाली और अवैध हथियारों को जब्त करना ही वर्तमान में सुरक्षा बलों का मुख्य मिशन है। इस समय राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीआरपीएफ, बीएसएफ, असम राइफल्स, आईटीबीपी और एसएसबी को मिलाकर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की कुल 325 कंपनियों को तैनात किया गया है।
कोबरा कमांडो को दी गई दो महीने की कड़ी और विशेष ट्रेनिंग
मणिपुर के बेहद संवेदनशील और उथल-पुथल भरे माहौल में तैनाती से पहले सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो को दो महीने की विशेष और कड़क ट्रेनिंग से गुजरना पड़ा है। इस विशेष प्रशिक्षण में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है:
- हिंसा और झड़पों को रोकना: मैतेई, कुकी और नागा समुदायों के बीच बढ़ती झड़पों और हिंसा पर तुरंत नियंत्रण पाना।
- महिला समूहों से निपटना: प्रदर्शनों के दौरान सामने आने वाले स्थानीय महिलाओं के समूहों से कानून-व्यवस्था के दायरे में रहकर कुशलतापूर्वक निपटना।
- बंकर और एम्बुश प्वाइंट्स को नष्ट करना: उग्रवादियों द्वारा जंगलों और संवेदनशील इलाकों में बनाए गए अवैध बंकरों तथा घात लगाने वाले ठिकानों को चिन्हित कर पूरी तरह जमींदोज करना।
इसके अलावा, जवानों की सुरक्षा और त्वरित कार्रवाई के लिए सीआरपीएफ को 100 से अधिक आधुनिक बुलेटप्रूफ वाहन भी मुहैया कराए गए हैं। जिन क्षेत्रों में लगातार उग्र प्रदर्शन हो रहे हैं, वहां नियंत्रण पाने के लिए विशेष दंगा नियंत्रण टीमों को अलग से मुस्तैद किया गया है।
बिना पुख्ता रणनीति के किसी भी अनियोजित मिशन पर रोक
सुरक्षा बलों की सुरक्षा और अभियान की शत-प्रतिशत सफलता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय कमान ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। मणिपुर में तैनात सीआरपीएफ और उसकी विशेष इकाई कोबरा को किसी भी तरह के ‘अनियोजित मिशन’ (बिना योजना वाले अभियान) से पूरी तरह दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है।
साफ कर दिया गया है कि पर्याप्त संख्या बल और अचूक खुफिया इनपुट के बिना जमीन पर कोई भी विशेष ऑपरेशन नहीं चलाया जाएगा। सुरक्षा बल पूरी तैयारी और ठोस रणनीति तैयार करने के बाद ही किसी अभियान के लिए आगे बढ़ेंगे।
अर्धसैनिक बलों का भारी जमावड़ा
मणिपुर में शांति व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए केंद्रीय बलों का भारी जमावड़ा मौजूद है। वर्तमान में सीआरपीएफ और कोबरा कमांडो के अलावा, सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 100 से अधिक कंपनियां संवेदनशील इलाकों में गश्त कर रही हैं। इसके साथ ही, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) की भी दर्जनों कंपनियां राज्य के विभिन्न दूरदराज और सीमावर्ती हिस्सों में कानून-व्यवस्था को बहाल रखने के लिए मुस्तैदी से तैनात हैं।

