पुणे/लंदन: ठीक एक साल पहले, 12 जून 2025 की वह मनहूस दोपहर आज भी भारत और ब्रिटेन के विमानन इतिहास के सबसे काले दिन के रूप में दर्ज है। आज उस भयानक एअर इंडिया विमान हादसे (Air India Plane Crash) की पहली बरसी है, जिसने सैकड़ों हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए तबाह कर दिया। इस दिल दहला देने वाली त्रासदी में अपनी पत्नी जैमिनी और अपने होने वाले अजन्मे बच्चे को खोने वाले गुंजन कुमार चौधरी आज उसी दर्दनाक क्रैश साइट पर खड़े थे। आँखों के आँसू पूरी तरह सूख चुके थे, चेहरा पीला पड़ चुका था, लेकिन सीने से पत्नी की तस्वीर चिपकाए खड़े गुंजन के दिल में सिस्टम से इंसाफ पाने की तड़प आज भी उतनी ही जिंदा थी। शादी के लंबे 10 साल के इंतजार के बाद उनके सूने आंगन में किलकारी गूंजने वाली थी, क्योंकि जैमिनी दो महीने की गर्भवती थीं, लेकिन नियति के एक क्रूर झटके ने उनके पूरे संसार को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया।
12 साल का अटूट साथ और पल भर में उजड़ गया सपनों का आशियाना
गुंजन और जैमिनी का रिश्ता 12 साल पुराना और बेहद अटूट था। दो साल की सगाई और फिर 10 साल का सफल वैवाहिक जीवन। इसी साल 25 जनवरी 2025 को दोनों ने अपनी शादी की 10वीं सालगिरह बेहद धूमधाम से मनाई थी। साल 2022 में दोनों अपनी आँखों में बड़े-बड़े अरमान लेकर बेहतर भविष्य के लिए लंदन (UK) शिफ्ट हुए थे। वहां दोनों प्रतिष्ठित कंपनियों में कार्यरत थे— जैमिनी ‘नाइकी हेल्थ केयर लिमिटेड’ में एक सम्मानित पद पर थीं और गुंजन ‘ओथॉन लिमिटेड’ में काम करते थे।
वे दोनों बहुत पहले से माता-पिता बनना चाहते थे, लेकिन मध्यमवर्गीय प्राथमिकताओं के चलते जैमिनी हमेशा कहती थी कि पहले विदेश में पूरी तरह सैटल हो जाएं, फिर बच्चे के बारे में सोचेंगे। आखिरकार भगवान ने उनकी पुकार सुनी और जैमिनी प्रेग्नेंट हुईं। दोनों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था, पर वे नहीं जानते थे कि किस्मत उनके साथ कितना खौफनाक खेल खेलने जा रही है। गुंजन आज भी लंदन के उसी फ्लैट में बिल्कुल अकेले रहते हैं। यादों के उस डरावने साए में वे आज भी हर रात ठीक 4:00 बजे चौंककर उठ जाते हैं, अनजाने में बिस्तर पर पत्नी का हाथ ढूंढते हैं, उसका नाम पुकारते हैं और फिर घने सन्नाटे के बीच फूट-फूटकर रोने लगते हैं।
वह आखिरी मुस्कान, वीडियो कॉल और फिर हमेशा के लिए पसरा सन्नाटा
यह खुशहाल जोड़ा 9 मई को भारत आया था। गुंजन की 64 वर्षीय वृद्ध मां काफी बीमार थीं और जैमिनी को भी अपने दांतों का कुछ जरूरी इलाज कराना था। गुंजन की छुट्टियां जल्द खत्म हो गईं, तो वे 21 मई को अकेले लंदन लौट गए। जैमिनी करीब तीन साल बाद भारत अपने मायके आई थी और उसके पास ऑफिस की छुट्टियां बची हुई थीं, इसलिए वह वलसाड (गुजरात) में अपने माता-पिता के पास कुछ दिन और रुक गई।
12 जून 2025 की दोपहर ठीक 12:39 बजे: जैमिनी ने एअर इंडिया के उस अभागे बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर (Boeing 787-8 Dreamliner) विमान में बोर्डिंग करने के बाद सीट पर बैठकर गुंजन को वीडियो कॉल किया। उसने स्क्रीन पर मुस्कुराते हुए अपने आखिरी शब्द कहे, ‘मैं निकल चुकी हूं, मुझे हीथ्रो (लंदन) एयरपोर्ट पर रिसीव करने समय से आ जाना।’ यही उसकी आखिरी मुस्कान और अंतिम शब्द थे। इसके कुछ ही मिनटों बाद, रनवे से टेक-ऑफ करते ही विमान तकनीकी रूप से अनियंत्रित होकर पास के बीजे मेडिकल कॉलेज हॉस्टल (BJ Medical College Hostel) की इमारत पर जा गिरा। महज 60 सेकंड के भीतर आसमान से मौत का तांडव बरसा। विमान में सवार 242 यात्रियों में से 241 की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि जमीन पर मौजूद 19 बेकसूर लोगों ने भी जान गंवा दी। इस खौफनाक हादसे में कुल 260 मौतें दर्ज हुईं। लंदन में ड्यूटी पर तैनात गुंजन को जब फोन पर यह खबर मिली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और वे वहीं दफ्तर के फर्श पर अचेत होकर गिर पड़े।
पैसे से नहीं तुलेगी अपनों की जान; टाटा ग्रुप के फाइनल सेटलमेंट को ठुकराया
हादसे के एक साल बीतने पर एअर इंडिया प्रबंधन ने अब पीड़ितों के परिवारों के लिए अंतिम मुआवजे (Final Compensation) का एक कॉर्पोरेट प्रस्ताव सामने रखा है। कंपनी ने जैमिनी के सालाना वेतन (Salary) का 16 गुना पैसा अंतिम मुआवजे के रूप में देने की पेशकश की है, लेकिन गुंजन ने इस करोड़ों रुपये के प्रस्ताव को लात मार दी है। उन्होंने बेहद भावुक और आक्रोशित होते हुए कहा, “कोई एयरलाइन कंपनी या चंद पैसों के बंडल यह कैसे तय कर सकते हैं कि मेरी पत्नी और मेरा होने वाला बच्चा कितना जीते? क्या इन नोटों से मेरी उजड़ी हुई दुनिया और मेरा अजन्मा बच्चा वापस आ जाएगा? अपनों की जान पैसों से नहीं तोली जा सकती।” गुंजन ने स्पष्ट किया कि शुरुआत में उन्होंने टाटा ग्रुप (Tata Group) की तरफ से तत्कालिक मानवीय सहायता के रूप में दी गई एक करोड़ रुपये की अंतरिम मदद और एयरलाइन का शुरुआती बीमा मुआवजा जरूर स्वीकार किया था ताकि कानूनी और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो सके, लेकिन वे एअर इंडिया के इस ‘अंतिम समझौते’ विलेख (Final Settlement Deed) पर किसी भी कीमत पर दस्तखत नहीं करेंगे।
AAIB की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार; UK की अदालत में अकेले केस लड़ेंगे गुंजन
इंसाफ की इस सबसे बड़ी और लंबी लड़ाई के लिए गुंजन ने अब पूरी तरह कमर कस ली है। वे किसी पीड़ित समूह (Victims Group) के साथ मिलकर सामूहिक केस नहीं कर रहे, बल्कि यूनाइटेड किंगडम (UK) की अंतरराष्ट्रीय अदालत में अकेले अपने दम पर एअर इंडिया के खिलाफ मुकदमा दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। यूके में उनका वर्क परमिट 16 जुलाई 2028 तक वैध है, और वे तब तक वहीं रहकर इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाएंगे।
गुंजन एयरलाइन और शुरुआती जांच के उस दावे को सिरे से खारिज करते हैं जिसमें इसे ‘पायलट की गलती’ (Pilot Error) बताया जा रहा था। उनका दृढ़ विश्वास है कि बोइंग ड्रीमलाइनर विमान में कोई गंभीर आंतरिक तकनीकी या इलेक्ट्रिकल खराबी (Technical/Electrical Snag) थी, जिसे छुपाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे वर्तमान में विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की अंतिम आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। यदि उस अंतिम रिपोर्ट में भी पूरी गलती मृत पायलट के सिर मढ़कर एयरलाइन को क्लीन चिट देने की कोशिश की गई, तो वे अंतरराष्ट्रीय फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के जरिए उस रिपोर्ट को भी ब्रिटेन की अदालत में कड़ी चुनौती देंगे।

