सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद आयोग का कड़ा रुख; एक सप्ताह के भीतर मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
मुंबई: सार्वजनिक प्रदर्शनों में नाबालिग बच्चों को जुटाने और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के गंभीर मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बेहद गंभीरता से लिया है। दो अक्तूबर को आयोजित एक व्यापक विरोध प्रदर्शन के दौरान बच्चों के कथित उपयोग और उनसे जुड़ी डिजिटल सामग्री के अनियंत्रित प्रसार पर आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए कई शीर्ष प्रशासनिक व तकनीकी प्राधिकरणों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए हैं।
आयोग ने मुंबई पुलिस आयुक्त, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई), महाराष्ट्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के भारत स्थित शिकायत अधिकारी को औपचारिक नोटिस प्रेषित किए हैं। मानवाधिकार आयोग ने संबंधित सभी पक्षों और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस पूरे प्रकरण में की गई कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर आयोग के समक्ष अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें।
एनएचआरसी के समक्ष दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, आरोप है कि दो अक्तूबर को आयोजित विरोध प्रदर्शन में नाबालिग बच्चों को सुनियोजित तरीके से शामिल और लामबंद किया गया था। इसके बाद प्रदर्शन स्थल से बच्चों की पहचान उजागर करने वाली तस्वीरें और वीडियो तैयार कर उन्हें विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर व्यापक रूप से साझा और प्रसारित किया गया।
आयोग की आधिकारिक कार्यवाही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ विशेष पोस्ट और फुटेज का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। इन वीडियो में कथित तौर पर एक छोटे बच्चे को भारी भीड़ के बीच अपने कंधों के ऊपर उठाए हुए दिखाया गया है। बच्चा अपने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा और एक तख्ती लिए नजर आ रहा था। इस दौरान आसपास मौजूद लोग उग्र नारेबाजी कर रहे थे और मोबाइल फोन कैमरों से इस दृश्य को रिकॉर्ड कर इंटरनेट पर प्रसारित कर रहे थे। बाल अधिकारों के संरक्षण और मानवाधिकार मानकों के उल्लंघन को लेकर आयोग ने मामले में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

