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Saturday, July 11, 2026

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तटीय सुरक्षा होगी अभेद्य: गृह मंत्री अमित शाह ने ‘पत्तन सुरक्षा ब्यूरो’ (BOPS) की समीक्षा की; विशाखापत्तनम, JNPT और मुंद्रा पोर्ट पर ट्रायल के निर्देश

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की तटीय और समुद्री सीमाओं को अभेद्य बनाने के संकल्प को दोहराते हुए एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार (10 जुलाई 2026) को नवनिर्मित पत्तन सुरक्षा ब्यूरो (Bureau of Port Security – BOPS) के गठन में हुई प्रगति की उच्च स्तरीय समीक्षा की।

गृह मंत्री ने देश के आर्थिक और रणनीतिक द्वारों (बंदरगाहों) की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए कई कड़े विधिक व प्रशासनिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

1. बड़े बंदरगाहों पर CISF करेगी सुरक्षा का ट्रायल

गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को विशेष जिम्मेदारी सौंपते हुए निर्देश दिए हैं:

  • सुरक्षा का ट्रायल: सीआईएसएफ देश के सबसे बड़े और संवेदनशील बंदरगाहों—विशाखापत्तनम पोर्ट (Andhra Pradesh), जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT – Maharashtra) और मुंद्रा पोर्ट (Gujarat)—पर जाकर बीओपीएस को सौंपी जाने वाली सुरक्षा प्रणालियों का विधिक व व्यावहारिक ट्रायल (Trial) शुरू करे।
  • कंटेनर स्कैनिंग: बीओपीएस की सुरक्षा व्यवस्था के तहत आने वाले सभी बंदरगाहों पर हर आने-जाने वाले कार्गो की गहन कंटेनर स्कैनिंग की अनिवार्य व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

2. मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 2025 के तहत वैधानिक निकाय है ‘बीओपीएस’

पत्तन सुरक्षा ब्यूरो (BOPS) के विधिक स्वरूप, प्रशासनिक ढांचे और जिम्मेदारियों का विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:

विधिक और प्रशासनिक आयामब्यूरो (BOPS) का रणनीतिक व तकनीकी ढांचा
विधिक स्थापनाइसका गठन Merchant Shipping Act, 2025 की धारा 13 के कड़े प्रावधानों के तहत एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) के रूप में किया जा रहा है।
प्रशासनिक नियंत्रणयह ब्यूरो केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के अधीन काम करेगा और इसका नेतृत्व एक महानिदेशक (Director General) करेंगे।
मुख्य नियामक कार्ययह जहाजों (Ships) और बंदरगाहों पर मौजूद तमाम नागरिक व वाणिज्यिक सुविधाओं की सुरक्षा से संबंधित नियामक एवं निरीक्षण कार्यों के लिए विधिक रूप से उत्तरदायी होगा।
साइबर सुरक्षा प्रभागबंदरगाहों की आईटी अवसंरचना (IT Infrastructure) को डिजिटल खतरों और हैकिंग से सुरक्षित रखने के लिए इसमें एक डेडिकेटेड साइबर सुरक्षा प्रभाग शामिल होगा।

3. निजी सुरक्षा कर्मियों के लिए सीआईएसएफ से ट्रेनिंग अनिवार्य

बंदरगाहों की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में मैनपावर के स्तर पर बड़े विधिक सुधारों को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं:

बंदरगाह सुरक्षा हेतु मैनपावर नीति⎩⎧​1. लाइसेंस अनिवार्य:2. CISF से प्रशिक्षण:3. केंद्रीय डेटाबेस:​बंदरगाहों की सुरक्षा में केवल विधिक रूप से लाइसेंस प्राप्त निजी सुरक्षा एजेंसियां ही तैनात रहेंगी।तैनात होने वाले निजी सुरक्षा कर्मियों का सीआईएसएफ (CISF) से प्रशिक्षित होना अनिवार्य होगा।बीओपीएस में तैनात किए जाने वाले सभी सुरक्षाकर्मियों का एक विस्तृत केंद्रीय डेटाबेस तैयार किया जाएगा।​

4. ‘नभमित्र’ एप का होगा देशव्यापी प्रचार-प्रसार
गृह मंत्री ने मत्स्यपालन विभाग (Department of Fisheries) के अधिकारियों के साथ बैठक में देश के सभी फिशिंग हार्बर्स और फिश लैन्डिंग सेंटर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। तटीय सुरक्षा में मछुआरों को बड़ी कड़ी मानते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित ‘नभमित्र’ (Nabhmitra) एप का तेजी से प्रचार-प्रसार किया जाए। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक संख्या में नाविक और मछुआरे इस जीवनरक्षक व सुरक्षा एप को अपने मोबाइल में डाउनलोड करें, ताकि समुद्र में किसी भी आपातकालीन स्थिति या चक्रवात के समय उन्हें वास्तविक समय (Real-Time) में विधिक व सुरक्षा सहायता प्रदान की जा सके।

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