नई दिल्ली: दुश्मन की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखने और भारतीय वायुसेना (IAF) की निगरानी क्षमता को नई ऊंचाई देने के लिए एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C Mk-2) कार्यक्रम को गति दी जा रही है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए दो प्रमुख औद्योगिक साझेदारों—अडाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और एआई इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड (AIESL) के साथ दो महत्वपूर्ण अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं।
वाणिज्यिक विमान बनेंगे आधुनिक ‘फ्लाइंग कमांड सेंटर’
नई दिल्ली में रक्षा सचिव और डीआरडीओ अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए:
- AIESL की भूमिका: डीआरडीओ का सेंटर फॉर एयर बोर्न सिस्टम्स (CABS) छह एयरबस A321 कमर्शियल विमानों को विशेष सैन्य भूमिका के लिए मॉडिफाई करने हेतु AIESL के साथ काम करेगा।
- अडाणी डिफेंस की भूमिका: अडाणी डिफेंस को मिशन सिस्टम्स के विकास और उत्पादन साझेदार (Development-cum-Production Partner) के रूप में चुना गया है, जो विमानों को उड़ता हुआ कमांड और कंट्रोल सेंटर बनाने के लिए अत्याधुनिक सेंसर और सिस्टम तैयार करेगी।
क्यों खास हैं AEW&C Mk-2 विमान?
AEW&C विमानों को किसी भी आधुनिक वायुसेना की ‘आंख और कान’ माना जाता है। MK-2 संस्करण में कई एडवांस फीचर्स शामिल होंगे:
- लंबी दूरी तक सर्विलांस: ये विमान सैकड़ों किलोमीटर दूर तक हवाई, समुद्री और जमीनी गतिविधियों पर रियल-टाइम निगरानी रख सकते हैं।
- सुरक्षित संचार नेटवर्क: यह प्रणाली लड़ाकू विमानों, एयर डिफेंस सिस्टम और कमांड हेडक्वार्टर को बिना किसी रुकावट के वास्तविक समय का डेटा भेजेगी।
- लंबी उड़ान क्षमता: नए प्लेटफॉर्म से भारतीय वायुसेना को दूरस्थ सीमाओं पर लंबे समय तक गश्त करने और खतरों का समय रहते पता लगाने की क्षमता मिलेगी।
‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिलेगी रफ्तार
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना केवल भारत की हवाई निगरानी क्षमता को नहीं बढ़ाएगी, बल्कि स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी और निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी नया बल देगी। एयरबस डिफेंस एंड स्पेस द्वारा मॉडिफाई किए गए विमानों में डीआरडीओ और अडाणी डिफेंस के स्वदेशी सिस्टम एकीकृत किए जाएंगे, जिसके बाद भारतीय वायुसेना की संयुक्त टीम इसके व्यापक टेस्ट फ्लाइट आयोजित करेगी।

