2035 तक देश को होगी 25,000 अतिरिक्त पायलटों की जरूरत; केंद्रीय मंत्री के. राममोहन नायडू ने जारी किए लेटर ऑफ इंटेंट
नई दिल्ली:
भारत में नागरिक उड्डयन क्षेत्र के तेज विस्तार के बीच केंद्र सरकार ने देश में ही पायलट प्रशिक्षण (Pilot Training) की क्षमता को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने बताया कि सरकार देश में ट्रेनर विमानों और सीप्लेन (Seaplane) के निर्माण के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने पर काम कर रही है।
इसी दिशा में नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए (DGCA) मिलकर फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) के बुनियादी ढांचे में सुधार कर रहे हैं।
11 नए एफटीओ (FTO) की शुरुआत और क्षमता विस्तार
नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन को ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (Letter of Intent) सौंपे:
- नए ट्रेनिंग सेंटर: ये 11 नए एफटीओ भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के 7 हवाई अड्डों पर अपने प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करेंगे।
- 750 नए कैडेट्स: इन नए एफटीओ के शुरू होने से देश में हर साल करीब 750 अतिरिक्त पायलटों को प्रशिक्षण देने की क्षमता विकसित होगी।
- वर्तमान स्थिति: फिलहाल देश में 41 एफटीओ के कुल 63 प्रशिक्षण केंद्र संचालित हो रहे हैं। पिछले दो सालों में एफटीओ के पास प्रशिक्षण विमानों की संख्या 324 से बढ़कर 385 हो गई है।
कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) के रिकॉर्ड आंकड़े
नागरिक उड्डयन मंत्री ने बताया कि देश में कमर्शियल पायलट लाइसेंस जारी करने की दर में लगातार इजाफा हो रहा है:
| वर्ष | जारी किए गए CPL लाइसेंस |
| वर्ष 2024 | 1,347 |
| वर्ष 2025 | 1,652 (पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा) |
“ट्रेन इन इंडिया, फ्लाई इन इंडिया”—2035 का विजन
नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने बताया कि अगले पांच वर्षों में भारतीय एयरलाइनों के बेड़े में लगभग 500 नए विमान शामिल होंगे (जबकि कुल 1,640 विमानों का ऑर्डर दिया जा चुका है)।
- 25,000 पायलटों की जरूरत: 2035 तक देश को लगभग 25,000 नए पायलटों की आवश्यकता होगी। इसके लिए हर साल कम से कम 2,500 कमर्शियल पायलट लाइसेंस जारी करने का लक्ष्य रखा गया है।
- एप लॉन्च: कार्यक्रम के दौरान पारदर्शी और सुगम प्रशिक्षण प्रक्रिया के लिए ‘FTO IFR स्लॉट बुकिंग एप’ भी लॉन्च किया गया।

