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Tuesday, June 16, 2026

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टीएमसी में आर-पार: बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने स्पीकर को लिखा पत्र, कल्याण बनर्जी को लोकसभा से निष्कासित करने की मांग

नई दिल्ली: अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी अंदरूनी कलह और बगावत अब पूरी तरह से दिल्ली के सियासी गलियारों में सार्वजनिक हो चुकी है। टीएमसी के बागी गुट की वरिष्ठ नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला को एक बेहद कड़ा पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने टीएमसी के ही वरिष्ठ व फायरब्रांड सांसद कल्याण बनर्जी को लोकसभा की सदस्यता से तत्काल निष्कासित (Expel) करने की आधिकारिक मांग की है।

काकोली घोष ने कल्याण बनर्जी पर संसद भवन के भीतर उनके और अन्य महिला सांसदों के खिलाफ लगातार अपमानजनक, अमर्यादित और अभद्र टिप्पणियां करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

“डराने-धमकाने वाली भाषा और व्यक्तिगत उत्पीड़न” — पत्र के मुख्य अंश

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को 10 जून 2026 को भेजे गए अपने पत्र में काकोली घोष दस्तीदार ने कल्याण बनर्जी की कार्यशैली और आचरण पर तीखे सवाल उठाए हैं:

  • सांसद पद की गरिमा के खिलाफ: उन्होंने कहा कि कल्याण बनर्जी का व्यवहार किसी भी जनप्रतिनिधि या सांसद के पद की मर्यादा और गरिमा के अनुकूल नहीं है। वे सदन के भीतर बार-बार व्यक्तिगत हमले करने और डराने-धमकाने वाली असंसदीय भाषा का उपयोग करने के आदी हो चुके हैं।
  • लगातार दुर्व्यवहार: पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह कोई एक बार की भूल या आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि महिला सांसदों के प्रति उनका यह अपमानजनक रवैया एक पैटर्न बन चुका है, जो लगातार दोहराया जाता है।
  • मानसिक पीड़ा: काकोली घोष ने आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी की टिप्पणियां केवल वैचारिक या राजनीतिक मतभेदों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सीधे तौर पर ‘व्यक्तिगत मानसिक उत्पीड़न’ (Personal Harassment) और दुर्व्यवहार की श्रेणी में आती हैं। इससे महिला सांसदों को गहरी मानसिक पीड़ा पहुंचती है और संसद में उनकी स्वतंत्र व निर्भीक भागीदारी पर विपरीत असर पड़ता है।

बागी सांसदों को कल्याण बनर्जी ने दी थी खुली चुनौती

यह नया और तीखा विवाद ऐसे समय में चरम पर पहुंचा है जब तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और बागी सांसदों के बीच का अंतर्विरोध खुलकर सतह पर आ गया है।

हाल ही में कल्याण बनर्जी ने बागी गुट पर चौतरफा हमला बोलते हुए उन्हें सरेआम एक राजनीतिक चुनौती दी थी। बनर्जी ने कहा था कि यदि बागी सांसदों में जरा सी भी राजनीतिक हिम्मत और नैतिकता बची है, तो वे संसद और टीएमसी से इस्तीफा दें और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सिंबल पर दोबारा चुनाव लड़कर अपनी ताकत दिखाएं।

टीएमसी के 20 बागी सांसदों का ‘एनसीपीआई’ (NCPI) में विलय

पार्टी में मचे इस सियासी भूचाल के बीच बागी गुट ने लोकसभा में अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है:

  1. स्पीकर से मुलाकात: रविवार को काकोली घोष दस्तीदार के ही नेतृत्व में टीएमसी के 20 बागी लोकसभा सांसदों ने संसद भवन में स्पीकर ओम बिरला से एक महत्वपूर्ण मुलाकात की थी।
  2. अलग बैठने की मांग: इन बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपकर सदन के भीतर मूल टीएमसी ब्लॉक से अलग बैठने की व्यवस्था (Separate Seating Arrangement) करने का आग्रह किया है।
  3. पार्टी का विलय: काकोली घोष ने औपचारिक घोषणा करते हुए बताया कि उनके नेतृत्व वाले इस 20 सांसदों के समूह ने अब नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में अपना पूर्ण विलय कर लिया है। उन्होंने दावा किया कि सौंपे गए ज्ञापन पर सभी 20 सांसदों के वैध हस्ताक्षर मौजूद हैं, जिससे तकनीकी रूप से दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता सुरक्षित रह सके।

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