चेन्नई: तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के बाद नई बनी तमिझगा वेत्री कड़गम (TVK) सरकार ने राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला दस्तावेज़ जारी किया है। तमिलनाडु के वित्त मंत्री मैरी विल्सन ने सचिवालय में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य की आर्थिक स्थिति पर एक विस्तृत श्वेत पत्र (White Paper) जारी किया। इस श्वेत पत्र में तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली पिछली डीएमके (DMK) सरकार की वित्तीय नीतियों, प्रशासनिक कमियों और आर्थिक कुप्रबंधन को विधिक व सांख्यिकीय साक्ष्यों के साथ उजागर किया गया है।
श्वेत पत्र के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में तमिलनाडु पर ₹10 लाख करोड़ का सीधा कर्ज का बोझ है, जबकि राज्य का राजस्व घाटा (Revenue Deficit) रिकॉर्ड ₹78,324 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है, जो राज्य के इतिहास में ‘अब तक का सबसे उच्चतम स्तर’ है। मुख्यमंत्री का पद संभालने के तुरंत बाद, टीवीके (TVK) के संस्थापक और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने जनता से वादा किया था कि उनकी सरकार राज्य की वित्तीय वास्तविकताओं को पारदर्शी तरीके से सामने लाएगी, जिसे इस श्वेत पत्र के जरिए पूरा किया गया है।
5 वर्षों में लगभग दोगुना हुआ तमिलनाडु का कर्ज
दस्तावेज़ के मुताबिक, 1 अप्रैल 2021 को तमिलनाडु पर कुल बकाया कर्ज ₹5.13 लाख करोड़ था, जो 31 मार्च 2026 तक आते-आते बढ़कर लगभग ₹10 लाख करोड़ ($10,00,000$ करोड़) हो गया। यानी पिछले पांच वर्षों के भीतर राज्य का कर्ज तकरीबन दोगुना हो चुका है।
वित्त मंत्री मैरी विल्सन ने एक बड़ा वित्तीय खुलासा करते हुए कहा कि यदि इसमें राज्य सरकार के विभिन्न उपक्रमों और सार्वजनिक क्षेत्र के बोर्ड्स (जैसे बिजली और परिवहन निगम) द्वारा लिए गए ऑफ-बजट कर्ज को भी जोड़ दिया जाए, तो तमिलनाडु का वास्तविक संचयी कर्ज भार (Actual Debt Burden) ₹13.18 लाख करोड़ के डरावने आंकड़े तक पहुंच जाता है।
श्वेत पत्र के 6 सबसे प्रमुख और निष्कर्ष बिंदुविजय सरकार ने अपनी इस आधिकारिक वित्तीय रिपोर्ट में छह मुख्य निष्कर्षों को रेखांकित किया है:
- कर्ज में भारी उछाल: राज्य का कुल कर्ज पांच वर्षों में करीब 100% (दोगुना) बढ़ा।
- ब्याज की मार: संचित कर्ज के कारण वार्षिक ब्याज भुगतान का बोझ बेतहाशा बढ़ गया है।
- स्थायी घाटा: राजस्व घाटा अब कोई अस्थायी समस्या नहीं, बल्कि बजट का स्थायी हिस्सा बन गया है।
- कमजोर टैक्स ढांचा: राज्य की अपनी कर संग्रहण (Tax Collection) क्षमता में भारी गिरावट आई है।
- विकास कार्यों में कटौती: वेतन, पेंशन और ब्याज जैसे प्रतिबद्ध खर्चों के कारण बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास के लिए धन की भारी कमी हो गई है।
- छिपी हुई देनदारियां: सरकारी उपक्रमों की छिपी हुई विधिक देनदारियां वास्तविक कर्ज को लगातार गुणा कर रही हैं।
प्रति व्यक्ति कर्ज ₹1.29 लाख; अन्य विकसित राज्यों से बदतर स्थिति
रिपोर्ट के आर्थिक संकेतकों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में तमिलनाडु का कर्ज-जीएसडीपी अनुपात (Debt-to-GSDP Ratio) 28.3 प्रतिशत रहा, जो कोविड-19 महामारी का दौर बीत जाने के बाद भी नीचे नहीं लाया जा सका। इस वित्तीय असंतुलन के कारण तमिलनाडु के प्रत्येक नागरिक पर प्रति व्यक्ति देनदारी (Per Capita Debt) बढ़कर ₹1,28,934 हो गई है। रिपोर्ट में विधिक तुलना करते हुए बताया गया है कि यह प्रति व्यक्ति कर्ज कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे भारत के अन्य बड़े और औद्योगिक राज्यों की तुलना में काफी ज्यादा है।
ब्याज भुगतान में 61% की भारी वृद्धि; कमाई का बड़ा हिस्सा हो रहा स्वाहा
श्वेत पत्र के अनुसार, तमिलनाडु का वार्षिक ब्याज भुगतान (Annual Interest Payment) जो वर्ष 2021-22 में ₹41,564 करोड़ था, वह वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹67,050 करोड़ के पार चला गया है। यह केवल पांच वर्षों में 61 प्रतिशत ($61\%$) की तीव्र वृद्धि को दर्शाता है।
- वर्तमान में राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों (Total Revenue Receipts) का लगभग 22.8 प्रतिशत हिस्सा केवल पुराने कर्जों का ब्याज चुकाने में नष्ट हो रहा है।
- यदि राज्य के अपने कर राजस्व (SOTR) से तुलना करें, तो उसका करीब 34.8 प्रतिशत हिस्सा सीधे ब्याज भुगतान की भेंट चढ़ रहा है।
वित्त मंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि तमिलनाडु अब अपनी भावी पीढ़ियों के विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं पर पूंजी लगाने के बजाय, केवल पुराने राजनीतिक कर्जों का ब्याज चुकाने वाला राज्य बनकर रह गया है।
कर संग्रहण अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर; ₹51,000 करोड़ का नुकसान
वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, राज्य की अपनी कर आय और सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का अनुपात वर्ष 2021-22 के 5.93 प्रतिशत से गिरकर वर्ष 2025-26 में मात्र 5.45 प्रतिशत रह गया है, जो तमिलनाडु के इतिहास का सबसे निचला स्तर (All-Time Low) है।
| वित्तीय वर्ष | राज्य का अपना कर-जीएसडीपी अनुपात (SOTR-to-GSDP) |
| 2021-22 | 5.93% |
| 2025-26 | 5.45% (ऐतिहासिक गिरावट) |
सरकार का प्राधिकृत दावा है कि कर संग्रहण में आई इस सुस्ती के कारण पिछले तीन वर्षों में राज्य को लगभग ₹51,000 करोड़ के संभावित राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इस गिरावट की चपेट में जीएसटी (GST), पेट्रोलियम पर लगने वाला वैट (VAT), स्टांप शुल्क, आबकारी कर (Excise Duty) और मोटर वाहन कर जैसे सभी प्रमुख राजस्व स्रोत शामिल हैं।
भ्रष्टाचार, वित्तीय लीकेज और प्रतिबद्ध व्यय (Committed Expenditure) की चुनौती
टीवीके (TVK) सरकार ने इस खस्ताहाल आर्थिक स्थिति के लिए सीधे तौर पर कर संग्रह करने वाले विभागों में व्याप्त संस्थागत भ्रष्टाचार और राजस्व के रिसाव (Revenue Leakage) को जिम्मेदार ठहराया है। इसके साथ ही, राज्य का प्रतिबद्ध व्यय (वेतन, पेंशन और ब्याज) वर्ष 2021-22 के ₹1.25 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹1.89 लाख करोड़ हो गया है।
अब यह अनिवार्य खर्च राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों का 64.4 प्रतिशत हिस्सा अकेले खा रहा है। अन्य प्रशासनिक खर्चों को जोड़ देने पर राज्य की 87 प्रतिशत कमाई पहले से ही लॉक हो जाती है। यही कारण है कि नए विकास कार्यों और पूंजीगत निवेश (Capital Expenditure) के लिए बजट में केवल 11.8 प्रतिशत धन ही शेष बच रहा है, जो कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात की तुलना में भारत में सबसे कम है।
यह राजनीतिक प्रतिशोध नहीं, वित्तीय शुचिता का प्रयास: मुख्यमंत्री विजय
श्वेत पत्र पर उठने वाले संभावित राजनीतिक विवादों पर विराम लगाते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस दस्तावेज़ को जारी करने का उद्देश्य किसी भी दल या नेता पर व्यक्तिगत या राजनीतिक प्रतिशोध के तहत आरोप लगाना नहीं है। इसका एकमात्र विधिक उद्देश्य तमिलनाडु की वास्तविक और नग्न वित्तीय स्थिति को राज्य की साढे सात करोड़ जनता के समक्ष पूरी पारदर्शिता के साथ रखना था। मुख्यमंत्री विजय ने आश्वस्त किया है कि उनकी सरकार आने वाले समय में कड़े वित्तीय अनुशासन (Fiscal Discipline), भ्रष्टाचार पर पूर्ण विराम और प्रशासनिक कार्यकुशलता में सुधार लाकर तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था को पुनः पटरी पर लाने के लिए कड़े कदम उठाएगी।

