विशाखापत्तनम: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में शांति, संप्रभुता और स्थिरता बनाए रखने वाला सबसे प्रमुख और जिम्मेदार देश है। वैश्विक सुरक्षा के लगातार बदलते और जटिल होते हालातों के बीच देश के समुद्री हितों की रक्षा करने के लिए उन्होंने भारतीय नौसेना (Indian Navy) के अदम्य साहस की जमकर तारीफ की है।रक्षामंत्री बुधवार, 10 जुलाई 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में नौसेना कर्मियों को संबोधित कर रहे थे। अवसर था भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होने जा रहे छठे स्वदेशी प्रोजेक्ट 17ए (Project 17A) स्टील्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरी’ (Mahendragiri) के कमीशनिंग की पूर्व संध्या पर आयोजित विशेष ‘बाराखाना’ कार्यक्रम का, जहां उन्होंने अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों का हौसला बढ़ाया।
1. ‘हिंद महासागर हमारा आंगन है, सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी’भारत को हिंद महासागर क्षेत्र का नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर (Net Security Provider) बताते हुए रक्षा मंत्री ने सुरक्षित समुद्री माहौल के प्रति देश की विधिक प्रतिबद्धता दोहराई:साझा विरासत: राजनाथ सिंह ने बेहद कड़े शब्दों में कहा, “यह पूरा क्षेत्र हमारा आंगन है और इसकी विधिक सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी ही जिम्मेदारी है।”बाहरी ताकतों को चेतावनी: उन्होंने आगाह किया कि बढ़ते भू-राजनीतिक कॉम्पिटिशन और इस क्षेत्र से बाहर की ताकतों की अवांछित मौजूदगी ने समुद्री सतर्कता को और बढ़ा दिया है। ऐसे में हमारी नौसेना सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ महत्वपूर्ण वैश्विक जलमार्गों (SLOCs) को सुरक्षित रख रही है।
2. आर्थिक तरक्की के लिए समुद्री सुरक्षा का विधिक महत्वदेश के आर्थिक और रणनीतिक हितों को रेखांकित करते हुए रक्षामंत्री ने समुद्री रास्तों के महत्व का तकनीकी व व्यावहारिक विश्लेषण प्रस्तुत किया:भारत की समुद्री निर्भरता एवं सुरक्षा ⎩⎨⎧ 1. व्यापारिक कड़ियां:2. ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security):3. संप्रभु क्षेत्र (EEZ): भारत का **90 प्रतिशत से अधिक** वाणिज्यिक व्यापार (By Volume) समुद्री रास्तों से होता है।कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति के लिए देश पूरी तरह समुद्री मार्गों पर निर्भर है।विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) और द्वीपीय क्षेत्रों का विधिक संरक्षण आवश्यक है।
3. आत्मनिर्भरता का प्रतीक: स्टील्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’रक्षामंत्री ने विशाखापत्तनम में तैयार हुए आधुनिक स्वदेशी युद्धपोत ‘महेंद्रगिरि’ का उदाहरण देते हुए कहा कि यह देश की आत्मनिर्भर होती रक्षा क्षमताओं और ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) का एक शानदार विधिक प्रतीक है। उन्होंने नौसैनिकों से अपनी तकनीकी स्किल्स को लगातार अपग्रेड करने और अत्याधुनिक प्रणालियों में महारत हासिल करने का आह्वान किया।
4. भविष्य के अघोषित युद्धों के प्रति नौसेना को किया सचेतभविष्य की रक्षा चुनौतियों पर बात करते हुए राजनाथ सिंह ने हाइब्रिड और अप्रत्याशित युद्ध कला की विधा पर प्रकाश डाला:अघोषित संघर्ष: आने वाले समय में संघर्ष नए और जटिल रूप में सामने आ सकते हैं। अब ऐसे भी छद्म संघर्ष देखने को मिल रहे हैं जो बिना किसी औपचारिक युद्ध की विधिक घोषणा के लड़े जाते हैं।अतीत से अलग शत्रु: उन्होंने सैनिकों को सचेत किया कि कल का शत्रु अतीत के शत्रु जैसा बिल्कुल नहीं होगा। वह साइबर, स्पेस और अंडरवाटर डोमेन से वार कर सकता है।संबोधन के अंत में उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार सैनिकों को दुनिया के सबसे बेहतरीन हथियार, टेक्नोलॉजी और संसाधन देने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। इस खास विधिक अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला सहित कई शीर्ष सैन्य कमांडर मौजूद रहे।

