केंद्र सरकार के सांस्कृतिक दृष्टिकोण पर साधा निशाना, भाजपा पर लगाया खान-पान की बहुलता की अनदेखी का आरोप
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आधिकारिक भोज में केवल शाकाहारी व्यंजन परोसे जाने को लेकर राजनीतिक गलियारों में नया विवाद छिड़ गया है। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने सोमवार को इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ दल पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत के विशाल खान-पान की समृद्ध विविधता में केवल शाकाहारी भोजन ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार के मांस और समुद्री भोजन (सी-फूड) भी गहराई से शामिल हैं। ऐसे में इसे देश की व्यापक और वास्तविक सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग माना जाना चाहिए।
सरकार की सोच में दिखता है खास सांस्कृतिक झुकाव समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान कार्ति चिदंबरम ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की संकीर्ण राजनीतिक और वैचारिक सोच वैश्विक मंचों पर भारत की छवि और संस्कृति को प्रस्तुत करने के तरीके को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन का आयोजन करते समय हमें एक खुले और समावेशी मेजबान की तरह व्यवहार करना चाहिए, जो सभी वैश्विक मेहमानों और देश के हर हिस्से की खान-पान परंपराओं का सम्मान करे।
विविधता को सीमित करने का लगाया आरोप कांग्रेस सांसद ने तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान सरकार यह मानकर काम कर रही है कि पूरे देश को केवल एक विशिष्ट सांस्कृतिक ढांचे और सोच का ही अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल की अपनी एक सीमित सामाजिक और वैचारिक पहचान है, जिसके तहत वे देश के करोड़ों नागरिकों की खान-पान संबंधी बहुलता और तटीय व दक्षिणी राज्यों की सांस्कृतिक परंपराओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के मेन्यू को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।

