सीमा विवाद का स्थायी समाधान चाहता है बीजिंग, रणनीतिक मोर्चे पर भारतीय सेना की पैनी निगरानी
नई दिल्ली: वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर लंबे समय से जारी तनातनी के बीच रणनीतिक मोर्चे से एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। रक्षा मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में तैनात अपने सैनिकों की संख्या में कमी की है। हालांकि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वर्तमान में सीमा पार चीन के कितने सैनिक तैनात हैं, लेकिन चीनी सैनिकों के पीछे हटने और रक्षा मंत्रालय द्वारा इसे आधिकारिक तौर पर दर्ज किए जाने को दोनों देशों के रिश्तों में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सीमा विवाद पर चीन का रुख और भारत की नीति रिपोर्ट और कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, चीन की सरकार अब भारत के साथ दशकों पुराने सीमा विवाद को एक ही बार में पूरी तरह सुलझाना चाहती है। चीन की यह मांग पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के दौर से चली आ रही है। दूसरी तरफ, भारत इस जटिल विवाद का समाधान राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर चरणबद्ध तरीके से तथा राष्ट्रीय संप्रभुता के पूर्ण सम्मान के साथ करने का पक्षधर है।
भारतीय सेना की रणनीतिक सतर्कता और तैयारी चीनी सैनिकों की संख्या घटने के बावजूद भारतीय सेना किसी भी स्थिति में ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। भारत ने सीमावर्ती क्षेत्रों पर अपनी मजबूत पकड़ और नियंत्रण बनाए रखते हुए लद्दाख सेक्टर में सैनिकों की रणनीतिक तैनाती और आधुनिक रक्षा साजो-सामान की पूरी तैयारी कर रखी है। सुरक्षा विशेषज्ञ इस घटनाक्रम को सकारात्मक पहल मान रहे हैं, लेकिन साथ ही सीमा पर निरंतर सतर्कता और निगरानी बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं।

