34 C
Mumbai
Monday, March 23, 2026
No menu items!

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

विदाई से 13 दिन पहले राष्ट्रपति बाइडन को झटका, निप्पॉन स्टील ने कोर्ट में घसीटा; 15 अरब USD के सौदे का केस

Array

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन मुश्किल में फंस सकते हैं। दरअसल, जापान की निप्पॉन स्टील और यूएस स्टील ने बाइडन के फैसले को चुनौती दी है। उसने 15 अरब डॉलर के सौदे को रोकने के निर्णय खिलाफ मुकदमा दायर किया है। 

गौरतलब है, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने जापान की निप्पॉन स्टील द्वारा पिट्सबर्ग स्थित यूएस स्टील के अधिग्रहण के करीब 15 अरब डॉलर के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। यह कदम बाइडन के मार्च में किए गए वादे को सही साबित करता है, जिसमें उन्होंने इस अधिग्रहण को रोकने की बात कही थी। बाइडन ने बीते शुक्रवार को कहा था, ‘हमें अमेरिका के राष्ट्रीय हितों की खातिर लड़ाई का नेतृत्व करने के लिए अमेरिकी इस्पात निर्माण क्षमता के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख अमेरिकी कंपनियों की जरूरत है।’

क्या है आरोप?
आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रपति बाइडन और उनके प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने राजनीतिक फायदे के लिए इस समीक्षा प्रक्रिया को गलत तरीके से प्रभावित किया। साथ ही इस सौद को रोककर स्टील उद्योग श्रमिकों को नुकसान पहुंचाया है। 

विदेशी निवेश की समीक्षा करने वाली समिति नहीं ले सकी थी कोई फैसला
अमेरिकी सरकार ने यह कदम तब उठाया जब विदेशी निवेश की समीक्षा करने वाली समिति इस सौदे पर निर्णय नहीं ले सकी। राष्ट्रपति बाइडन का कहना था कि वे यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि अमेरिकी स्टील उद्योग मजबूत और अमेरिकी स्वामित्व में रहे। कंपनियां अब उस समिति से फिर से समीक्षा करने की मांग कर रही हैं।

इसके अलावा, उन्होंने क्लेवलैंड-क्लिफ्स नामक अमेरिकी स्टील कंपनी और यूनाइटेड स्टीलवर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष के खिलाफ एक और मुकदमा दायर किया है, जिसमें आरोप है कि इन दोनों ने मिलकर इस सौदे को कमजोर करने की कोशिश की। 

अदालत क्यों पहुंची कंपनियां?
यह मुकदमा चुनावी राजनीति में फंसे एक सौदे को बचाने के लिए किया गया एक आखिरी कोशिश है। हालांकि, राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित फैसलों में व्यापक अधिकार होते हैं और अब तक किसी भी ऐसे फैसले को अदालतों ने पलटा नहीं है। कंपनियों का कहना है कि उन्हें यह अदालत का रुख इसलिए करना पड़ा क्योंकि उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था। 

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here