अध्यक्ष राधा मोहन सिंह ने राहुल गांधी से मांगे दस्तावेज; यूएई से भगोड़े हुसैन शट्टाफ के प्रत्यर्पण पर भी भारत ने दिया बड़ा अपडेट
नई दिल्ली:
संसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति की मंगलवार को हुई बैठक में सैनिक स्कूलों के संचालन और साझेदारी (PPP) मॉडल को लेकर तीखी चर्चा हुई। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सैनिक स्कूलों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भागीदारी अनावश्यक रूप से बढ़ रही है।
इस पर समिति के अध्यक्ष राधा मोहन सिंह और भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी से अपने दावों के समर्थन में आधिकारिक दस्तावेज और तथ्य प्रस्तुत करने को कहा।
सैनिक स्कूलों के ‘साझेदारी मॉडल’ पर सवाल-जवाब
बैठक के दौरान सैनिक स्कूलों, राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज और राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूलों की समीक्षा की गई:
स्पष्टीकरण की मांग: समिति अध्यक्ष राधा मोहन सिंह ने कहा कि यदि राहुल गांधी प्रासंगिक दस्तावेज उपलब्ध कराते हैं, तो उन्हें रक्षा मंत्रालय के पास आधिकारिक स्पष्टीकरण के लिए भेजा जाएगा।
पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत संस्थाएं: बैठक में बताया गया कि साझेदारी मॉडल के तहत विद्या भारती और सरस्वती शिशु मंदिर सहित विभिन्न निजी व सामाजिक संगठनों को नए सैनिक स्कूल चलाने की जिम्मेदारी दी गई है। समिति ने कहा कि इन संस्थाओं की व्यवस्था की भी समीक्षा की जाएगी।
भगोड़े हुसैन मोहम्मद शट्टाफ के प्रत्यर्पण पर विदेश मंत्रालय का अपडेट
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वर्ष 2006 के चर्चित हत्या मामले के भगोड़े आरोपी हुसैन मोहम्मद शट्टाफ के प्रत्यर्पण पर अहम जानकारी दी:
अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग: भारत द्वारा भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोध पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने कुछ अतिरिक्त दस्तावेज मांगे हैं, जिन्हें भारत सरकार तैयार कर भेजने की प्रक्रिया में जुटी है।
क्या है मामला? हुसैन शट्टाफ महाराष्ट्र के लोनावला में वर्ष 2006 में हुए सेवानिवृत्त मर्चेंट नेवी कैप्टन मनमोहन सिंह विरदी की हत्या के मामले में मुख्य वांछित है। उस पर जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट बनवाने का भी आरोप है।
रक्षा उपक्रमों के आधुनिकीकरण पर भी हुई चर्चा
स्थायी समिति की बैठक में सैनिक स्कूलों के अलावा रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) के आधुनिकीकरण, रक्षा निर्माण में ‘आत्मनिर्भरता’ और एमएसएमई (MSME) की भागीदारी को बढ़ावा देने जैसे प्रमुख विषयों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

