जब अयोध्या में श्रीराम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक आयोजन हुआ, उसी समय गुजरात के सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट ने एक विशेष आध्यात्मिक अभियान का संकल्प लिया था। इस अभियान को “सोमनाथ से अयोध्या राम नाम मंत्र लेखन यज्ञ” नाम दिया गया था।
पीएम मोदी ने की थी पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो स्वयं सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं, ने इस अभियान की शुरुआत राम का नाम लिखकर की थी। ट्रस्ट ने 1.25 करोड़ “राम” नाम लिखने का लक्ष्य रखा था, जिसे राम भक्तों ने समय से पहले ही पूरा कर लिया।
लक्ष्य से कई गुना आगे निकला अभियान
- प्राण प्रतिष्ठा से पहले ही 3.5 करोड़ बार “राम” नाम लिखा गया और इसे अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपा गया।
- अब तक यह संख्या 8.5 करोड़ से भी अधिक हो चुकी है, जिससे यह अभियान ऐतिहासिक रूप से सबसे बड़ा राम नाम लेखन यज्ञ बन गया है।
इस अभियान का महत्व
- यह अभियान राम भक्ति, आध्यात्मिक एकता और भारतीय संस्कृति की शक्ति को दर्शाता है।
- राम नाम लेखन को सनातन परंपरा में धर्म, भक्ति और साधना का सर्वोच्च साधन माना जाता है।
- यह श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और समर्पण का प्रतीक है, जो राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए एक प्रेरणादायक उपलब्धि है।
निष्कर्ष
“सोमनाथ से अयोध्या राम नाम मंत्र लेखन यज्ञ” ने एक ऐतिहासिक भक्ति आंदोलन का रूप ले लिया है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु अपनी आस्था और भक्ति से जुड़े हैं। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के साथ-साथ यह अभियान भी सनातन संस्कृति के गौरव को बढ़ाने का कार्य कर रहा है।

