गुवाहाटी: असम में लगातार हो रही मूसलाधार मानसूनी बारिश के चलते बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण ऊपरी असम के दर्जनों गांव जलमग्न हो चुके हैं। इस आपदा के बीच भारतीय सेना ने मोर्चेबंदी करते हुए ‘ऑपरेशन जल राहत’ शुरू किया है, जिसके तहत 19 जुलाई से अब तक 571 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
24 घंटे एक्टिव मोड में सेना की स्पीयर कोर
भारतीय सेना की स्पीयर कोर स्थानीय नागरिक प्रशासन और राज्य सरकार के साथ मिलकर चौबीसों घंटे राहत व बचाव कार्य में जुटी हुई है। सेना की टीमें मोटरबोट्स और विशेष इंजीनियरिंग उपकरणों के जरिए तेज बहाव वाले इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंच रही हैं। बचाव अभियान में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को पहली प्राथमिकता दी जा रही है।
इन तीन जिलों में सबसे ज्यादा तबाही
बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित तीन प्रमुख जिलों में सेना की विशेष टीमें तैनात की गई हैं:
- शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट: इन जिलों में 45 सैन्यकर्मियों वाली 3 विशेष राहत टीमें दिन-रात रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।
- कई गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह कट चुका है, जहां केवल नावों के जरिए ही राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
मेडिकल कैंप और राहत सामग्री का वितरण
रेस्क्यू के अलावा सेना प्रभावित परिवारों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता और खाद्य सामग्री भी उपलब्ध करा रही है। राहत टीमों को इमरजेंसी मेडिकल किट से लैस किया गया है ताकि पानी से घिरे इलाकों में तुरंत इलाज दिया जा सके।
जब तक हालात सामान्य नहीं होते, जारी रहेगा अभियान: सेना
सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि हालांकि कुछ निचले इलाकों में पानी का स्तर धीरे-धीरे कम होना शुरू हुआ है, लेकिन जब तक स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ जाती, ‘ऑपरेशन जल राहत’ जारी रहेगा। देश की सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ आपदा के समय नागरिकों की जान बचाना भी सेना का प्रमुख कर्तव्य है।

