भारत की अध्यक्षता में मेजबानी कर रहा प्रवर्तन निदेशालय; नौकरशाही की अड़चनों को दूर करने का आह्वान
नई दिल्ली: एसेट रिकवरी इंटरएजेंसी नेटवर्क, एशिया पैसिफिक (एआरआईएन-एपी) की 11वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) सोमवार को देश की राजधानी में औपचारिक रूप से शुरू हो गई। वर्ष 2026 के लिए इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की अध्यक्षता भारत संभाल रहा है, जिसके तहत नेटवर्क की राष्ट्रीय नोडल एजेंसी के रूप में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस महत्वपूर्ण वैश्विक सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। 28 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस चार दिवसीय सम्मेलन में सदस्य देशों, पर्यवेक्षक संगठनों के अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के साथ-साथ विभिन्न भारतीय सुरक्षा व जांच एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं।
बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए ईडी निदेशक ने भारत की अध्यक्षता के दौरान नेटवर्क के लिए दो प्रमुख प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने विदेशी जांच एजेंसियों से मिलने वाले सहयोग अनुरोधों पर त्वरित कार्रवाई करने और सीमा पार वित्तीय अपराधों की जांच को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर विशेष बल दिया। ईडी प्रमुख ने यह सुझाव भी दिया कि सदस्य देश केवल जानकारी साझा करने तक सीमित न रहें, बल्कि नेटवर्क को उन ठोस मामलों का नियमित डेटाबेस भी रखना चाहिए जिनमें आपसी सहयोग के जरिए वास्तव में आपराधिक संपत्ति को जब्त कर स्वदेश वापस लाया गया। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की तमाम प्रतिबद्धताओं के बावजूद वैश्विक अनुमान यह दर्शाते हैं कि अपराध से अर्जित जो संपत्ति अंततः कुर्क या जब्त होती है, वह कुल अनुमानित राशि की तुलना में बेहद कम है।
ईडी निदेशक ने उपस्थित सदस्य देशों के प्रतिनिधियों से इस विसंगति के कारणों पर गहराई से आत्ममंथन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वित्तीय अपराधों की जांच करने वाले अधिकारी अक्सर सही सावधानी बरतने के प्रयास में घरेलू कानूनों की जटिल बारीकियों में उलझ जाते हैं। कई मामलों में सामने आने वाली रुकावटें वास्तविक कानूनी अड़चनों के बजाय नौकरशाही से जुड़ी प्रक्रियात्मक देरी होती हैं। उन्होंने सभी देशों से इस बात की समीक्षा करने की अपील की कि जांच के दौरान कौन सी औपचारिकताएं अनिवार्य वैधानिक आवश्यकताएं हैं और किन प्रशासनिक बाधाओं को आपसी तालमेल से सुलझाया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भले ही विभिन्न देशों की कानूनी प्रणालियां भिन्न हो सकती हैं, लेकिन साझा उद्देश्य एक ही है—अपराधियों से उनकी अवैध काली कमाई और संपत्ति को पूरी तरह छीनना।

